विश्व बैंक ने चेताया- कोरोना महामारी से शिक्षा जगत के सामने है बड़ा खतरा

विश्व बैंक  ने चेताया- कोरोना महामारी से शिक्षा जगत के सामने है बड़ा खतरा
शिक्षा जगत को इस महामारी से सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा रहा है.

विश्व बैंक (world bank) में शिक्षा के वैश्विक निदेशक जैमी सावेद्रा ने कहा कि महामारी के चलते अब शिक्षा के परिणामों के और अधिक खराब होने का खतरा मंडरा रहा है.

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नई दिल्ली. कोरोना महामारी में दुनिया भर में लागू लॉकडाउन के बीच विश्व बैंक की शिक्षा टीम ने कहा कि कोविड-19 महामारी के चलते शिक्षा जगत में खतरा मंडरा रहा है. शिक्षा जगत को इस महामारी से सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा रहा है. विश्व बैंक की शिक्षा टीम ने कहा कि यदि कोई आक्रामक नीति नहीं बनाई गई तो दुनिया भर में इस वायरस के प्रकोप की कीमत बच्चों और युवाओं दोनों को चुकानी पड़ेगी.

विश्व बैंक की शिक्षा और नीति प्रतिक्रियाओं को झटका' शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी से पहले प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के 258 मिलियन (258000000) बच्चे और युवा स्कूल से बाहर थे और निम्न स्कूली शिक्षा का मतलब है कि स्कूल में कई ऐसे थे जो बहुत कम सीखते थे. सबसे वंचित बच्चे और युवाओं की स्कूली शिक्षा तक पहुंच बहुत खराब थी, स्कूली शिक्षा छोड़ने की दर अधिक थी.'

विश्व बैंक में शिक्षा के वैश्विक निदेशक जैमी सावेद्रा के अनुसार महामारी के चलते अब शिक्षा के परिणामों के और अधिक खराब होने का खतरा मंडरा रहा है. उन्होंने कहा, 'महामारी के चलते शिक्षा पहले से ही काफी प्रभावित हुई है, क्योंकि दुनिया में लगभग हर जगह स्कूल बंद हैं. यह हमारे जीवनकाल में सभी शिक्षा प्रणालियों के लिए सबसे बड़ा झटका है.'



रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
रिपोर्ट में कहा गया है, 'पहला कदम स्वास्थ्य और सुरक्षा की रक्षा करते हुए स्कूल बंद होने का सफलतापूर्वक सामना करना है और छात्रों को होने वाले नुकसान को दूरस्थ शिक्षा के जरिये कम किया जा सकता है. इसी समय देशों को स्कूल फिर से खोलने के लिए योजना शुरू करने की आवश्यकता है.

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