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छत्तीसगढ़: 9 महीने में सामने आए 1160 HIV के मरीज, सबसे ज्यादा केस रायपुर से

छत्तीसगढ़ में बढ़े एड्स के मरीज.
छत्तीसगढ़ में बढ़े एड्स के मरीज.

छत्तीसगढ़ में एचआईवी (HIV) मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. पिछले 9 महीने में 1160 मरीज प्रदेश भर में सामने आये हैं. सबसे ज्यादा 257 मरीज रायपुर जिले से मिले हैं. अब राजधानी में एचआईवी संक्रमितों की कुल संख्या 10 हजार116 हो गयी है.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ में एचआईवी (HIV) मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. कोरोना काल (COVID-19) के दौरान भी जब कई मरीजों के ब्लड सैंपल लिए गए तब कई जिलों में एचआईवी पॉजिटिव मरीज सामने आये. ऐसे में कोरोना के साथ बढ़ते एचआईवी मरीज भी स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बने हुए हैं. छत्तीसगढ़ में हर साल एड्स की जागरूकता के लिए लाखों खर्च किए जाते हैं लेकिन एचआईवी के मरीजों की संख्या इसके बाद भी लगातार बढ़ रही है. खासकर शहरी जिलों में एचआईवी के मरीजों की संख्या बढ़ी है जिनमें संक्रमण के शिकार सबसे ज्यादा युवा हो रहे हैं.

राज्य एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अतिरिक्त परियोजना संचालक एसके बिंझवार ने बताया कि कोरोना काल के दौरान भी पिछले 9 महीने में 1160 मरीज प्रदेश भर में सामने आये हैं जबकि हर साल की अपेक्षा सैंपल जांच में इस साल कमी आयी है. वहीं सबसे ज्यादा 257 मरीज रायपुर जिले से मिले हैं. ऐसे में राजधानी में एचआईवी संक्रमितों की कुल संख्या 10 हजार116 हो गयी है. अब छत्तीसगढ़ में कुल 30 हजार एचआईवी संक्रमित हैं जिनमें 15 हजार एक्टिव केस हैं जो लगातार एआरटी सेंटर से दवा ले रहे हैं.

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लोगों में एचआईवी टेस्ट को  लेकर बढ़ी जागरूकता
बढ़ते मरीजों की संख्या को लेकर एस बिंझवार का कहना है कि पहले लोग टेस्ट के लिए सामने नहीं आते थे. लेकिन अब लोग एचआईवी टेस्ट करा रहे हैं. इस साल 4 लाख 62 हजार लोगों की जांच की गयी. वहीं कोरोना काल के दौरान जांच में भले ही कमी आयी लेकिन एचआईवी संक्रमितों को लॉकडाउन होने के बाद भी नियमित दवाएं घर तक पहुंचाई जा रही है. वहीं जांच कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं और पीड़ितों को इलाज के लिए तुरंत एआरटी सेंटर भेजा जा रहा है.



स्वास्थ्य विभाग द्वारा भले ही ये दलील दी जा रही है कि टेस्टिंग के लिए लोगों के आगे आने की वजह से आंकड़े बढ़ रहे हैं, लेकिन सच ये भी है कि जागरूकता अभियान के नाम पर महज खानापूर्ति ही की जा रही है. इसलिए लोगों पर जन-जागरूकता का अस नहीं पड़ रहा है और मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है.
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