सहकारिता डेयरी से किसानों को भारी राहत, युवाओं को मिला रोज़गार

बालोद जिला मुख्यालय पर अल्ट्रामॉडर्न उपकरणों के साथ दूध प्रसंस्करण इकाई की स्थापना अब किसानों को बेहद राहत दे रही है.साथ ही आम लोगों को गुणवत्ता युक्त दूध और दूध से बने उत्पाद न्यूनतम कीमत पर उपलब्ध हो रहे हैं.

Santosh Kumar Sahu | News18 Chhattisgarh
Updated: September 12, 2018, 7:52 PM IST
सहकारिता डेयरी से किसानों को भारी राहत, युवाओं को मिला रोज़गार
सहकारिता डेयरी में मिल्क पाऊच तैयार करते युवा
Santosh Kumar Sahu | News18 Chhattisgarh
Updated: September 12, 2018, 7:52 PM IST
बालोद जिला मुख्यालय पर अल्ट्रामॉडर्न उपकरणों के साथ दूध प्रसंस्करण इकाई की स्थापना अब किसानों को बेहद राहत दे रही है.साथ ही आम लोगों को गुणवत्ता युक्त दूध और दूध से बने उत्पाद न्यूनतम कीमत पर उपलब्ध हो रहे हैं.डेयरी किसान सहकारिकता से जुड़कर इस दूध प्रसंस्करण के माध्यम से अनेक राष्ट्रीय व अंतरराज्यीय स्तर के लोकप्रिय ब्रांडो के साथ स्थानीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं.जिले में दूध व दूध उत्पादों की आपूर्ति लोगों को की जा रही है.अपनी स्थापना के कम समय में ही सहकारिता का ब्रांड लोगों में लोकप्रिय हो गया है.यह दूध प्रसंस्करण इकाई दूध उत्पादक किसानों व आम लोगों के लाभ के साथ जिले के बेरोजगार व प्रशिक्षण प्राप्त युवकों के लिए रोजगार का साधन बन गई है.इसकी स्थापना के बाद यहां एक दर्जन बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध हुआ है.

'आप हमे दूध दें और हम आपको आर्थिक लाभ देंगे'.बालोद जिला मुख्यालय में स्थापित दूध प्रसंस्करण इकाई का यह नारा किसानों और पशु पालकों को भा रहा है. बालोद जिला प्रशासन के द्वारा डीएमएफ फंड से निर्मित इस दूध प्रसंस्करण इकाई को सहकारिता के माध्यम से संचालित किया जा रहा है.दूध उत्पादक किसान सहकारी समिति से जुड़कर डेयरी के दूध को यहां ब्रिकी करते हैं जिसका उचित भुगतान उन्हें समय पर यहां से मिलता है.

किसानों की मानें तो पहले दूध उत्पादक किसान अपना दूध बाजार या होटलों में बेचते थे लेकिन उसका सही मूल्य उन्हें नहीं मिल पाता था.दूध बेचने के लिये उन्हें अलग-अलग स्थानों में जाना पड़ता था.लेकिन अब इन दूध उत्पादक किसानों को इससे राहत मिल गई है.यहां फिलहाल 30 रूपये प्रति लीटर के हिसाब से दूध खरीदा जा रहा है और समय-समय पर लाभांश वितरण करने की भी योजना है जो कि दूध उत्पादकों के लिए फायदा है.वहीं किसान भी इस बात को मान रहे हैं कि उन्हें अब एक जगह पर ही उनके दूध की उचित कीमत हासिल हो रही है.
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