मिसाल: सास ने विधवा बहू की शादी कराकर बेटी की तरह किया विदा

ज्ञानेश्वरी की सास चंपा बाई ने कहा कि उन्होंने हमेशा बहू को अपनी बेटी माना. बेटे की मौत के बाद उसे प्यार दुलार देने में कोई कमी नहीं की. विधवा की जिंदगी क्या होती है 'इसका दर्द मैं 15 सालों से झेल रही हूं.' बहू की कोई संतान भी नहीं थी, जिसके सहारे वो अपना जीवन गुजारती.

News18 Chhattisgarh
Updated: May 26, 2019, 12:02 PM IST
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Updated: May 26, 2019, 12:02 PM IST
छत्तीसगढ़ के बालोद की एक सास ने अपनी विधवा बहू की शादी कराकर अनूठी मिशाल कायम की है. दो साल से विधवा की जिंदगी जी रही ज्ञानेश्वरी की शादी कर, उसकी विधवा सास चंपा बाई ने उसे बेटी की तरह घर से विदा किया. बता दें कि दो साल पहले फागुनदाह में एक शादी समारोह के दौरान ज्ञानेश्वरी के पति डोमेंद्र साहू की मौत हो गई थी. पति की मौत से सदमा लगने के चलते ज्ञानेश्वरी का गर्भपात हो गया.

ज्ञानेश्वरी  दो साल से विधवा की जिंदगी जी रही थी. बहू की पीड़ा को देखते हुए सास ने उसकी दूसरी शादी कराने की ठानी. इसके लिए पहले उन्होंने बहू के मायके वालों की रजामंदी ली. इसी दौरान कांकेर जिला के झिपाटोला में रहने वाले कोमल राम साहू की और से ज्ञानेश्वरी से शादी करने का प्रस्ताव आया. मायके वाले भी इस शादी के लिए राजी हो गए. तीनों पक्ष (वर पक्ष, मायके वाले और ज्ञानेश्वरी के ससुराल वालों) की रजामंदी से शुक्रवार 24 मई को ससुराल में ही शादी हुई और वो अपने नए ससुराल चली गई.

बता दें कि कोमल राम का तलाक 3 साल पहले ही हो चुका था. उनका 22 साल का एक बेटा और 19 साल की बेटी है. बेटा इंजीनियरिंग और बेटी बीए प्रथम वर्ष की छात्रा है. दूल्हा कोमल ने कहा कि वे अपने बच्चों का ख्याल रखने और घर संभालने वाली दुल्हन के रूप में एक विधवा को तलाश रहे थे. जिससे दोनों की जिंदगी सवंर सके और वह मुझे मिल गई.

वहीं ज्ञानेश्वरी की सास चंपा बाई ने कहा कि उन्होंने हमेशा बहु को अपनी बेटी माना. बेटे की मौत के बाद उसे प्यार दुलार देने में कोई कमी नहीं की. विधवा की जिंदगी क्या होती है 'इसका दर्द मैं 15 सालों से झेल रही हूं.' बहू की कोई संतान भी नहीं थी, जिसके सहारे वो अपना जीवन गुजारती. ऐसे में उसकी शादी करवाने ही उसकी जिंदगी सवरती.

वहीं कोमल की बेटी विद्या ने कहा कि वो अपने पिता की सोच को सलाम करती हैं. जिंदगी की गाड़ी दो पहिए से ही चलती है और सबसे बड़ी बात है किसी महिला की उजड़ी मांग को फिर से भरना. उनके पिता ने एक नेक काम है और हम दोनों भाई-बहन भी इस शादी के लिए राजी थे.

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