बालोद : किसानों ने कहा- शकर कारखाने की मशीनों का ठीक तरीके से मेंटेनेंस हो
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बालोद में पिछले पेराई सीजन में कारखाना सही ढंग से नहीं चल पाया. इसका विपरीत असर गन्ना उत्पादक किसानों पर पड़ा. अब इसका खामियाजा किसानों को जनवरी माह में भी भुगतना पड़ सकता है.

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छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के करकाभाठ स्थित दंतेश्वरी मैया सहकारी शकर कारखाने में कई परेशानियां सामने आ रही हैं. बता दें कि पिछले पेराई सीजन में करोड़ों रुपए खर्च कर मशीनों का मेंटेनेंस कार्य किया गया था, उसके बाद भी सीजन में कई बार मशीनों में प्रॉब्लम आई. पिछले पेराई सीजन में कारखाना सही ढंग से नहीं चल पाया. इसका विपरीत असर गन्ना उत्पादक किसानों पर पड़ा. इस सीजन का पेराई कार्य जल्‍द ही शुरू होने वाला है. क्षेत्र के गन्‍ना उत्‍पादक किसानों का कहना कि पेराई शुरू होने से पहले मशीनों का सही ढंग से मेंटेनेंस किया जाए ताकि उन्‍हें परेशानी न हो.

गौरतलब है कि वर्ष 2009 में पहली बार इस शकर कारखाने में गन्ना पेराई का कार्य प्रारंभ हुआ था. इसकी पेराई क्षमता 1250 मीट्रिक टन प्रतिदिन है. 2009 के क्रॉसिंग सीजन में कुल 33 दिन यहां गन्ना पेराई का कार्य चला, जिसमें 4074 टन गन्ने की पेराई की गई.

इसके बाद हर साल यहां गन्ने का पेराई कार्य जारी है. साल 2013-14 में 136 दिन पेराई का कार्य चला और इस क्रॉसिंग सीजन में 103931 टन गन्ने की पेराई किया गया. पिछली बार पेराई सीजन में 78000 टन गन्ने का पेराई कार्य किया गया, लेकिन पिछले सीजन में यहां तीन बार मशीनों में प्रॉब्लम आई. इससे पेराई कार्य बुरी तरह प्रभावित रहा.



अब इस पेराई सीजन के पहले मशीनों को सही ढंग से मेंटेनेंस कराने की बात पर जोर दिया जा रहा है. वहीं ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार मशीने सही ढंग से चलेंगी, ताकि पिछली बार की तरह इस बार परेशानियों का सामना न करना पड़े.
कृषि विभाग की मानें तो पिछली बार जिले में 2127 हेक्टेयर गन्ने का रकबा था, जिसमें 7800 टन गन्ना पेराई के लिए हासिल हुआ. वहीं इस बार गन्ना उत्पादन का कुल लक्ष्य 3000 हेक्टेयर रखा गया है. इसके लिए किसानों को लगातार प्रेरित किया जा रहा हे.

बहरहाल, यह करकाभाठ स्थित दंतेश्वरी मैया सहकारी शकर कारखाना जिले के किसानों के लिए वरदान जरूर साबित होता, अगर इसका संचालन सही ढंग से होता. आवश्यकता है यहां व्याप्त खामियों को दूर करने की, ताकि यह कारखाना लाभदायक साबित हो सके.

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