'नेता नहीं सुनते बात, हम पीते हैं श्मशान का पानी, इसलिए करेंगे विस चुनाव का बहिष्कार'
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छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के एक गांव के लोगों ने विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है. इसके लिए ग्रामीणों ने बकायदा कलेक्टर के नाम आवेदन भी दिया है.

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  • Last Updated: November 15, 2018, 7:56 AM IST
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छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के एक गांव के लोगों ने विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है. इसके लिए ग्रामीणों में बकायदा कलेक्टर के नाम आवेदन भी दिया है. सालों से पानी की समस्या से जूझ रहे इन ग्रामीणों ने इस बार किसी भी नेता को वोट नहीं देने का मन बना लिया है. ग्रामीणों ने बैठक कर सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया गया है. अब ग्रामीणों को वोटिंग के लिए मनाना प्रशासन के लिए एक चुनौती है.

बालोद जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर गुंडरदही विधानसभा क्षेत्र के खपरी (हिरु) गांव में तालाब और कुआं है, दोनों लबालब भरे भी रहते हैं, फिर भी गांव वाले पीने का पानी लाने के लिए करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय कर रोज सुबह श्मशान घाट जाते हैं. ग्रामीणों को पानी की ये जद्दोज​हद सिर्फ गर्मी के मौसम में ही नहीं बल्कि पूरे साल करनी पड़ती है क्योंकि तालाब और कुएं का पानी पीने योग्य नहीं है.

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ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने कई बार क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों से इसकी शिकायत की, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ. खपरी (हिरु) गांव में करीब 40 साल से पीने के शुद्ध पानी की समस्या है. करीब 700 सौ की आबादी वाले इस गांव के तालाब और कुएं का पानी दूषित है. ग्रामीण लक्ष्मीनारायण साहू ने बताया कि यदि कुएं या तालाब का पानी पीते हैं तो उन्हें हैजा और डायरिया जैसी बीमारियां हो जाती है. इसके चलते गांव के कुछ लोगों की मौत भी हो चुकी है. तालाब या कुएं के अलावा पीने के पानी का कोई दूसरा विकल्प नहीं है इसलिए वे रोज सुबह श्मशान घाट का पीने का पानी लाने जाते हैं.

खपरी हिरु में चुनाव बहिष्कार के लिए बैठक कर चर्चा करते ग्रामीण.

पानी दो-वोट लो का नारा
ग्रामीण टोमन साहू, परमेश्वर सहित अन्य ने बताया कि दो दिन पहले ग्रामीणों ने एक बैठक की. बैठक में यह तय किया गया कि इस बार कोई भी चुनाव में हिस्सा नहीं लेगा, क्योंकि नेता उनकी बात नहीं सुनते. प्रशासनिक अधिकारी भी बस आश्वासन ही देते हैं. ऐसे में इस बार ग्रामीणों ने तय किया है कि जो भी वोट मांगने आएगा, उसे कहा जाएगा कि 'पानी दो-वोट लो'. पानी की समस्या दूर नहीं होने की स्थिति में ग्रामीण वोट देने नहीं जाएंगे.

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इस गांव में कोई लड़की नहीं ब्याहना चाह​ता 
ग्रामीण बारो देवी व पूर्व सरपंच माधुरी साहू सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पीने का पानी उपलब्ध नहीं है. पानी श्मशान से लाया जाता है इसलिए कोई भी यहां अपनी लड़की ब्याहना नहीं चाहता है. उनका कहना है कि इस गांव में शादी करने से उनकी बेटी को पानी के लिए परेशानी होगी. गांव के युवकों की शादी में परेशानी हो रही है. सामाजिक कार्यक्रमों के लिए आस-पास के गांव से खरीद कर पीने का पानी मंगाया जाता है.


पानी भरने के लिए श्मशान घाट जाता खपरी का ग्रामीण.

इसलिए पुरुष नहीं छोड़ते गांव
धार्मिक मान्यता के अनुसार श्मशान घाट में महिलाओं का जाना ठीक नहीं माना जाता है. इसलिए खपरी हिरु गांव के पुरुष और युवा श्मशान घाट से पानी भर कर लाते हैं. ग्रामीण लक्ष्मीनारायण साहू बताते हैं कि इस गांव के ज्यादातर पुरुष गांव छोड़कर दूसरी जगह नहीं जा पाते. यदि पुरुष किसी जरूरी काम से बाहर जाते भी हैं तो वे रात होते ही वापस आ जाते हैं क्योंकि सुबह-सुबह ही पीने का पानी भरने जाना होता है.

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