देश भ्रमण पर निकली दो बेटियां 13 हजार किलोमीटर का सफर पूरा कर पहुंचीं बालोद

बिहार की राजधानी पटना और झारखंड के जमशेदपुर की दो बेटियां साइकिल से देश भ्रमण पर निकली हैं. इसी क्रम में बिहार की उर्मिला और झारखंड की सावित्री मुर्मू 5 महीने से साइकिल यात्रा करते हुए 16 राज्यों से होते हुए बीते मंगलवार को छत्तीसगढ़ के बालोद पहुंची.

Santosh Kumar Sahu | News18 Chhattisgarh
Updated: April 25, 2018, 1:47 PM IST
देश भ्रमण पर निकली दो बेटियां 13 हजार किलोमीटर का सफर पूरा कर पहुंचीं बालोद
आदर्श नागरिक समाज के निर्माण के लिए देश की यात्रा पर निकलीं ये बेटियां
Santosh Kumar Sahu | News18 Chhattisgarh
Updated: April 25, 2018, 1:47 PM IST
बिहार की राजधानी पटना और झारखंड के जमशेदपुर की दो बेटियां साइकिल से देश भ्रमण पर निकली हैं. इसी क्रम में बिहार की उर्मिला और झारखंड की सावित्री मुर्मू 5 महीने से साइकिल यात्रा करते हुए 16 राज्यों से होते हुए बीते मंगलवार को छत्तीसगढ़ के बालोद पहुंची. आपको बता दें कि इस यात्रा में सबसे पहले पटना की एनसीसी कैडेट हर्षा और झारखंड की सावित्री देश के सभी 29 राज्यों के भ्रमण के लिए बीते 13 अक्टूबर को एनसीसी हेडक्वार्टर से साइकिल से रवाना हुई थी. हालांकि इस बीच महाराष्ट्र पहुंचने के बाद हर्षा के परिवार में किसी की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उसे बीच में ही इस सफर को छोड़ना पड़ा, लेकिन सावित्री अकेली न रह जाए इसलिए इस मिशन में बिहार की उर्मिला महाराष्ट्र से उनके साथ शामिल हो गईं. इसके बाद करीब 13  हजार किलोमीटर का सफर पूरा कर वे बालोद पहुंचीं.

उर्मिला और सावित्री की मानें तो इस पूरे भारत भ्रमण दौरे के पीछे उनका उद्देश्य किसी प्रकार का रिकॉर्ड बनाना नहीं बल्कि देश में आदर्श समाज का निर्माण करने का लक्ष्य है. उन्होंने बताया कि पूरे देश में करीब 25 हजार किलोमीटर का सफर तय करना है. साथ ही उर्मिला और सावित्री ने पूरे देश में अकेले साइकिल चलाकर समस्याओं को लेकर बताया कि उन्हें मालूम था मार्ग में कई समस्याएं आएंगी. बावजूद इसके दोनों ने अकेले साइकिल से देश भ्रमण के बारे में एनसीसी के डायरेक्टोरेट के साथ आइडिया शेयर किया.



उर्मिला की मानें तो इस दौरे में निकलने से पहले उनकी मां ने मना कर दिया था, लेकिन पापा को राजी कर जल्द घर लौट आने की बात कहकर वे घर से निकल पड़ी. दोनों के ही पैरेंट्स इन दोनों के इस निर्णय को मानने को तैयार नहीं हो रहे थे, लेकिन एनसीसी के अधिकारियों ने इनका जज्बा समझा और इन्हें सहयोग किया. इसके बाद उनके पैरेंट्स को भी मनाया.

अब तक इन दोनों लड़कियों ने यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, समेत करीब 16 राज्यों की सफर तय कर चुकी हैं. इन्होंने देश के सभी राज्यों के भ्रमण के लिए 25 हजार किलोमीटर का लक्ष्य रखा है. वहीं अभी तक इन दोनों ने करीब 13 हजार किलोमीटर का सफर पूरा कर लिया है.

उनका कहना है कि इस यात्रा के पीछे इनका मुख्य उद्देश्य देश में नारी सशक्तिकरण के बजाय मानवीय सशक्तिकरण को जगाना है. महज भावनात्मक तौर पर बोलकर नारे लगाने के बजाय अगर अपनी आदत को स्थानीय समस्या के समाधान के अनुसार बदल दिया जाए, तो किसी भी अभियान की जरूरत ही नहीं रहेगी.

दोनों बेटियों का मानना है कि युवा पीढ़ी को गरीबी, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे नारे लगाने के बजाय स्वयं उस क्षेत्र में आगे आकर काम करना चाहिए. बिहार की रहने वाली उर्मिला और झारखंड की रहने वाली सावित्री ने बताया कि आदर्श नागरिक समाज के निर्माण के लिए ही वो देश की यात्रा पर निकली हैं.

बहरहाल, आज पूरे देश में जहां बेटियों को लेकर एक अलग माहौल है. देश में जिस तरह लगातार बेटियों के ऊपर अत्याचार के मामले सामने आ रहे हैं, उन सबके बीच बिहार और झारखंड की दो बेटियों ने अपने जज्बे की मिसाल पेश की है.
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