VIDEO: ज्यादा रॉयल्टी वसूली पर ट्रैक्टर मालिक और चालकों ने जताया विरोध

बालोद जिले के ग्राम पंचायत ओरमा के प्रतिनिधियों पर अवैध खनन और रेत उत्खनन में 150 रुपए की जगह रॉयल्टी के नाम पर 500 रुपए तक की रॉयल्टी वसूली का मामला सामने आया है.

Santosh Kumar Sahu | News18 Chhattisgarh
Updated: July 11, 2018, 2:57 PM IST
Santosh Kumar Sahu | News18 Chhattisgarh
Updated: July 11, 2018, 2:57 PM IST
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में गौण खनिज के अवैध खनन का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. कभी चैन माउंटेन तो कभी बड़े बड़े ट्रकों के माध्यम से जिले के रेत को बाहर ले जाने का मामला सामने आ चुका है, लेकिन इस बीच बालोद जिले के ग्राम पंचायत ओरमा के प्रतिनिधियों पर अवैध खनन और रेत उत्खनन में 150 रुपए की जगह रॉयल्टी के नाम पर 500 रुपए तक की रॉयल्टी वसूली का मामला सामने आया है. इसे लेकर स्थानीय ग्रामीणों और ट्रैक्टर मालिक और चालकों में काफी विरोध है.

पूरे मामले में स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो ओरमा पंचायत को खनिज विभाग द्वारा मैन्युअल पद्धति से रेत खनन को लेकर अनुमति दी गई है. इसके तहत इन्हें अपने ही पंचायत क्षेत्र में खनन करने की अनुमति है, लेकिन पंचायत के प्रतिनिधियों और ठेकेदारों से मिलीभगत कर अन्य गांव की जमीन से रेत खनन किया जा रहा है.

वहीं इस रेत के रॉयल्टी के रूप में शासन द्वारा निर्धारित दर 50 रुपए घन मीटर के हिसाब से रुपए लिया जाना है, जिसके तहत ट्रैक्टर में 3 घन मीटर रेत की कीमत 150 रुपए निर्धारित की गई है. ग्राम पंचायत के सरपच और ठेकेदार की मिलीभगत से रॉयल्टी के नाम पर पैसे का बड़ा खेल चल रहा है. 150 रुपए की जगह सीधे तिगुना रकम यानि 450 से लेकर 500 रुपए वसूली की जा रही है, तो वहीं पैसे के लिए मौजूद ठेकेदार द्वारा नियुक्त किए गए कर्मचारियों ने भी स्वीकार करते हुए इसे पंचायत और ग्राम प्रमुखों के कहने पर लेने की बात कही है.

कर्मचारियों ने कहा कि इस तरह का खेल सभी खदानों में चल रहा है. इस अवैध वसूली के पैसे को गांव के विकास और जनसेवा में लगने की बात कही जबकि इसी खदान से लगे पड़ोस गांव टेकापार के ग्रामीण भी पंचायत की मनमानी को लेकर मौके पर पहुंचकर पंचायत और ठेकेदार द्वारा दूसरे गांव की जमीन से रेत निकालकर ज्यादा दामों में बेचने का भी विरोध किया. साथ ही अवैध खनन बंद नहीं होने पर कलेक्ट्रेट में शिकायत करने की बात कहते नजर आए. टेकापार के ग्रामीणों के इस विरोध के बाद पंचायत के जनप्रतिनिधि भी पंचायत से गायब हो गए हैं.

बालोद जिले के खदानों में अवैध खनन को लेकर पहले भी कई बार शिकायत हो चुकी है. इतना ही नहीं इसी अवैध खनन से परेशान होकर पहले भी भिलाई के एक युवक बालोद जिला मुख्यालय में भूख हड़ताल में बैठ चुका है. बावजूद इसके जिले में अवैध खनन कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है.
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