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जानिए, बलौदा बाजार में दाने-दाने को क्‍यों मोहताज है एक सैनिक परिवार

Narendra Sharma | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: September 3, 2017, 2:25 PM IST
जानिए, बलौदा बाजार में दाने-दाने को क्‍यों मोहताज है एक सैनिक परिवार
बलौदा बाजार में इस सैनिक परिवार को नहीं मिल रही सुविधाएं

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार के सिमगा में एक सैनिक परिवार को पेंशन व बुनियादी जरूरतों के लिये भटकना पड़ रहा है.

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छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार के सिमगा में एक सैनिक परिवार की हालत काफी दयनीय है. पेंशन व बुनियादी जरूरतों के लिये सैनिक के परिवार को भटकना पड़ रहा है.
सिमगा नगर निवासी थान सिंह निषाद सन् 19445-46 में सेना में भर्ती हुए. इसके बाद 23 जून 1975 को अपने गृह नगर सिमगा आने पर बीमारी के कारण थान सिंह का देहांत हो गया.
पहले तो सैनिक के विधवा फूलेश्वरी बाई को पेंशन मिली, लेकिन 5 से 6 साल बाद पेंशन बंद हो गयी.

इसके अलावा भरण—पोषण के लिए दस एकड़ कृषि जमीन शासन की ओर से सैनिक परिवार को दिया जाना था, लेकिन अब तक सैनिक के पुत्र सिमगा तहसील का चक्कर काट रहे हैं.

शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिलने के कारण नगर के बाहर सैनिक का परिवार नजूल जमीन पर झोपड़ी बनाकर फटेहाल जिंदगी गुजर—बसर करने मजबूर है.
सैनिक के दो बेटे सुदर्शन निषाद व लक्ष्मण निषाद की मानें तो पिता की मृत्यु के बाद बची पूंजी कोर्ट—कचहरी के चक्कर में बर्बाद हो गई.
जिला सैनिक कल्याण बोर्ड भी सैनिक परिवार का कल्याण नही कर पाया. सैनिक पुत्रों ने बताया कि इसकी शिकायत प्रशासन से की गई है, लेकिन कोई लाभ नहीं मिला.

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First published: September 3, 2017, 2:25 PM IST
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