जल शक्ति अभियान: नदी बचाने 35 साल से अपने खर्च पर पौधे लगा रहा ये शख्स
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जल शक्ति अभियान: नदी बचाने 35 साल से अपने खर्च पर पौधे लगा रहा ये शख्स
पानी की समस्या से न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया की जुझती नजर आ रही है.

News 18 के जल शक्ति अभियान के तहत जल संरक्षण के लिए काम करने वाले छत्तीसगढ़ के एक शख्स के बारे में हम आपको बता रहे हैं.

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पानी की समस्या से न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया की जुझती नजर आ रही है. विशेषज्ञ जल सरंक्षण के लिए काम करने का सुझाव देते हैं तो सरकारें भी इस ओर गंभीर कदम उठाने की योजनाओं पर काम कर रही हैं, लेकिन इन सबके बीच कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो अकेले के दम पर जल संरक्षण के लिए एक अभियान चला रहे हैं. जल संरक्षण के लिए काम करने वाले छत्तीसगढ़ के एक शख्स के बारे में हम आपको न्यूज 18 के जल शक्ति अभियान के तहत बताने जा रहे हैं.

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में एक गांव है कटगी. यहां से बलौदाबाजार की लाइफ लाइन कही जाने वाली जोक नदी को बचाने के लिए गांव के एक शख्स हीरारतन थवाईत अभियान चला रहे हैं. गांव की सात एकड़ बंजर जमीन पर इन्होंने 35 साल पहले पौधे लगाने का अभियान शुरू किया, जो आज भी अनवरत जारी है. ये श्ख्स न सिर्फ पौधे लगाते हैं, बल्कि उसे बचाने का भी काम खुद ही करते हैं. इसमें आने वाले खर्च का वहन भी वो ही करते हैं.

गांव के अपने घर के द्वार पर खड़े हीरारतन थवाईत.




इनसे मिली प्रेरणा
हीरारतन थवाईत ने न्यूज 18 को बताया कि करीब 35 साल पहले गांव मे मृत्यु होने पर दाह संस्कार करने नदी किनारे लाते थे, तब वहां कोई छायादार पेड़ नहीं होता था. तब लगा कि यहां बंजर जमीन पर वह पेड़ लगाएंगे, जो लोगों को छाया देगा. इसी बीच उनकी मुलाकात गायत्री शक्ति पीठ के प्रमुख आचार्य श्रीराम शर्मा से हुई. उनसे जुड़ने के बाद पता चला कि पेड़ छाया देने के साथ ही नदी व भूजल को संरक्षित करने का काम भी करता है. यहीं से उन्हें पेड़ लगाने की प्रेरणा मिली और 35 सालों से ये अभियान जारी है. गांव से होकर गुजरने वानी जोक नदी के किनारे वे पेड़ लगाते आ रहे हैं.

नदी किनारे लगाए गए पेड़.


500 से अधिक पेड़ लगाए
हीरातन बताते हैं कि नदी किनारे उनके लगाए आम, बरगद, पीपल, बेर, आंवला सहित अन्य प्रजाजि के 500 से अधिक पेड़ बड़े होकर लोगों को छाया व शीतलता प्रदान कर रहे हैं. अपने जीवन के पैतीस साल हीरा रतन ने पेड़ लगाने में ही गुजार दिये तथा सारी कमाई भी खर्च कर दी, गरीब किसान होते हुए भी पेड़ों की रक्षा स्वयं करते हैं. पेड़ लगाने का लाभ ये मिला कि गर्मी में भी नदी का जलस्तर बहुत कम नहीं होता और न ही नदी का क्षरण हो रहा है.

पेड़ों की रक्षा के लिए पत्थरों का घेरा.


बनाया पत्थर का घेरा
हीरातन बताते हैं कि वे पौधों की सुरक्षा घेरा पत्थर खरीदकर बनाते हैं. साथ ही घरों मे जाकर पौधे एकत्र कर उसे नदी किनारे लगाते हैं. यह हर रोज का काम है. आज सात एकड़ बंजर जमीन पर पांच सौ पौधे अब पेड़ लग गए हैं. हीरातन कहते हैं कि यहां आने से शांति मिलती है. नये पौधे लगाने का क्रम जारी है.

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