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26 साल से पेंशन के लिए भटक रही फौजी की विधवा

Narendra Sharma | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: August 15, 2017, 1:46 AM IST
26 साल से पेंशन के लिए भटक रही फौजी की विधवा
स्‍व. थानसिंह निषाद का परिवार और उनकी झोपड़ी.

छत्‍तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले की नगर पंचायत सिमगा में एक दिवंगत फौजी की विधवा को 26 साल पहले पेंशन मिलनी बंद हो गई. वह आज भी पेंशन के लिए भटक रही है.

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छत्‍तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले की नगर पंचायत सिमगा में एक दिवंगत फौजी का परिवार पिछले 37 साल से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है. आज यह परिवार गुमनामी की जिंदगी गुजर-बसर करने पर मजबूर है. फौजी की विधवा को 26 साल पहले पेंशन मिलनी बंद हो गई. वह आज भी पेंशन के लिए भटक रही है.

सिमगा का रहने वाले थानसिंह निषाद 1945 में कलकत्ता में सेना में भर्ती हुए थे. जब वे 23 जून 1975 को छुट्टी पर सिमगा में घर आए तो यहां बीमारी से उनका देहांत हो गया. उसके बाद उनके दो बेटों सुदर्शन निषाद व लक्ष्मण निषाद को न तो नौकरी मिली न ही सैनिक के परिवार के भरण पोषण के लिए सरकार की ओर से 10 एकड़ जमीन, जिसकी घोषणा की गई थी. अब यह परिवार मजदूरी कर अपना गुजर-बसर कर रहा है.

सैनिक थानसिंह निषाद की विधवा फूलेश्वरी बाई अभी जीवित हैं. वे आज भी सरकारी सहायता की आस लगाए बैठी हैं. शुरू के कुछ साल तक तो पेंशन मिली, लेकिन बाद में वह भी बंद हो गई. बेटों ने सैनिक कल्याण बोर्ड के हजारों चक्कर लगाए लेकिन उनका कल्याण न हो सका. कानूनी लड़ाई में रही-सही पूंजी भी जाती रही. न्‍यूज़18/ईटीवी ने फौजी के परिवार के बारे में जब कलेक्टर राजेश सिंह राणा को जानकारी दी तो उन्‍होंने सिमगा एसडीएम को जांच के आदेश दिए हैं.

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First published: August 15, 2017, 1:46 AM IST
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