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क्या Caste Factor दिला पाएगा कांग्रेस को इस सीट पर जीत?

News18 Chhattisgarh
Updated: November 27, 2018, 2:08 PM IST
क्या Caste Factor दिला पाएगा कांग्रेस को इस सीट पर जीत?
Demo Pic.

2018 के विधानसभा चुनाव में कसडोल सीट पर सभी की निजाहे टिकी हुई है. इस बार कसडोल में मुकाबला इसलिए भी रोचक है क्योंकि पहली बार इस सीट पर महिला प्रत्याशी को टिकट दिया गया.

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छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के मतदान के बाद अब सबकी नगाहे रिजल्ट पर टिकी है. सूबे के कई हाई प्रोफाइल सीटों पर दिग्गदों की साख का फैसला 11 दिसंबर को आने वाला है. बात अगर बलौदाबाजार की करें तो इस जिले का एक हाईप्रोफाइल सीट है कसडोल. कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले इस सीट पर कुछ सालों से जनता ने अपना रुख बदला है. कसडोल विधानसभा सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती रही है. कुछ सालों को छोड़ दें तो जनता यहां कांग्रेस को ही जीताती आई है. 2013 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर गौरीशंकर अग्रवाल ने अपनी जीत दर्ज की थी. 2018 के विधानसभा चुनाव में कसडोल सीट पर सभी की निजाहे टिकी हुई है. इस बार कसडोल में मुकाबला इसलिए भी रोचक है क्योंकि पहली बार इस सीट पर महिला प्रत्याशी को टिकट दिया गया. जहां बीजेपी जाति समीकरण को भुनाने की कोशिश कर रही है वहीं कांग्रेस ने साहू समाज से महिला प्रत्याशी को मैदान पर उतारकर मुकाबला रोचक बना दिया है.

कसडोस से ये है मैदान में

गौरीशंकर अग्रवाल- बीजेपी-

शकुंतला साहू- कांग्रेस

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे)- परमेश्वर यदू

रामेश्वर कैवर्त्य- बसपा

2013 के चुनाव पर एक नजर
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कसडोस विधानसभा सीट सामन्य सीट है. 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में कसडोल से बीजेपी ने जीत हासिल की थी. पिछले चुनाव में बीजेपी से गौरीशंकर अग्रावल और कांग्रेस के राजकमल सिंघानिया के बीच कड़ी टक्कर थी. गौरीशंकर अग्रावल को पिछले चुनाव में 96629 थे और राजकमल सिंघानिया को 70701 वोट हासिल हुए थे. गौरीशंकर अग्रावल ने 25,928 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी.

मतदाताओं की संख्या

कुल मतदाता- 3,25,304

महिला मतदाता- 1,60,479

पुरूष मतदाता- 1,64,986

जनता के मुद्दे

कसडोल क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, अस्पताल और डॉक्टरों की कमी, बेरोजगारी, सिंचाई, शिक्षा जैसे चुनावी मुद्दे है.

कास्ट फैक्टर का असर

अगर बात जातिगत समीकरण की करें तो 2013 के विधानसभा चुनाव में यहां जाति समीकरण का कुछ खास प्रभाव देखने को नहीं मिलता था. लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने साहू समाज की महिला प्रत्याशी को टिकट देकर इस समाज में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश की है. कसडोल में साहू वोटरों की संख्या सबसे ज्यादा है ऐसे में साहू समाज के महिला प्रत्याशी को मैदान में उतारकर एक तरह से जाति समीकरण को इस चुनाव में हवा देने की कोशिश की जा रही है. कसडोल में दूसरे नंबर पर सतनाम समाज तो वहीं तीसरे नंबर पर अन्य समाज आते है.
कसडोल का चुनावी समीकरण

2018 के विधानसभा चुनाव में कसडोल सीट पर बाहरी बनाम स्थानीय का मुद्दा जोरों पर है. कांग्रेस की शकुंतला साहू कसडोल की ही निवासी है. जो बीजेपी प्रत्याशी गौरीशंकर अग्रवाल को कड़ी टक्कर दे रही हैं. बात अगर बीजेपी की करें तो कसडोल से पार्टी ने गौरी शंकर अग्रवाल को टिकट दिया है. गौरतलब हो कि गौरीशंकर अग्रवाल 2013 का विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं. 1998 के बाद 2013 चुनाव में गौरीशंकर अग्रवाल ने इस सीट में बीजेपी का खाता खोला था. गौरीशंकर अग्रवाल बीजेपी का बड़ा चेहरा है और इस चेहरे पर पार्टी भी अपनी जीत निश्चित ही समक्ष रही है.

कांग्रेस भी इस बार बीजेपी का तख्ता पलट करने की पूरी कोशिश में लगी है. कांग्रेस ने साहू समाज से महिला प्रत्याशी को टिकट एक बड़ा खेल खेला है. कांग्रेस साहू समाज के वोट साधना की कोशिश में लगी है. इसके अलावा हाल ही में सतनामी समाज के गुरू बालदास भी कांग्रेस में शामिल हुए है. आपको बता दें कि कसडोल में वोटर्स की लिस्ट में बड़ी संख्या में सतनामी मतदाता आते है, इससे सतनामी समाज के वोट भी कांग्रेस, जनता कांग्रेस जोगी और बसपा से बटोर सकती है.

तो वहीं जनता कांग्रेस ने परमेश्वर यदू को अपना प्रत्याशी बनाया है. परमेश्वर यदू बीजेपी में रह चुके है. कुछ महीने पहले ही वे जनता कांग्रेस जोगी जे में शामिल हुए. बात अगर परमेश्वर यदू की करें तो वे स्थानीय प्रत्याशी है और इनकी पकड़ पिछड़े वर्ग में ज्यादा मानी जाती है. तो वहीं बसपा से रामेश्वर कैवर्त्य को टिकट दिया गया है. जकांछ और बसपा के गठबंधन के बावजूद दोनों ही पार्टीयों ने इस सीट पर अपने-अपने प्रत्याशियों को उतारा है जिससे वोटों का बंटवारा होना तय माना जा रहा है.

अब नतीजे ही बता पाएंगे कि जनता ने इस पर किसे अपना नेता चुनाव है. इन दिग्गजों का फैसला 11 दिसंबर को सामने आ जाएगा.

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First published: November 27, 2018, 2:06 PM IST
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