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पानी की कहानी: जानवरों के साथ पानी पीने को मजबूर हैं इस गांव के लोग

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के ग्रामीणों ने कहा कि हैंडपम्प तो है. लेकिन उसमें गंदा पानी आता है कि इसलिए उन्हें नदी का पानी पीना पड़ता है.

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न्यूज18 हिंदी की खास मुहिम 'पानी की कहानीमें आज पढ़िए ये रिपोर्ट. देश के बड़े हिस्से को पीने का पानी काफी मुश्किलों से मयस्सर होता है. लेकिन बड़ा सवाल यह भी है कि जो पानी मिलता भी है क्या वह पीने लायक होता हैतो हम आपको बता दें कि देश के करीब 29500 गांव और मोहल्लों में लगभग 4.80 करोड़ की आबादी जहरीला पानी पीने को मजबूर है17 राज्यों के ये 4.80 करोड़ लोग जहरीला पानी पी कर फ्लोरोसिस और दूसरी तमाम बीमारियों की चपेट में हैं. पढ़िए यह रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्टः

पुरानी कहावत है कि ग्रामीण तकलीफ झेलना जानते हैं, लेकिन बोलना नहीं जानते. छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के पटना गांव के हालात देखें तो यह बात सही साबित होती है. बलरामपुर के शंकरगढ़ ब्लॉक के जगीमा ग्राम पंचायत के पटना के ग्रामीण मवेशियों के साथ पानी पीने को मजबूर हैं.

ग्रामीण नदी के किनारे गड्ढा खोदकर पानी पीते हैं. उसी गड्ढे से मवेशी भी पानी पीते हैं. जब गांव में हैंडपम्प को लेकर सवाल उठा  तो ग्रामीणों ने कहा कि हैंडपम्प तो है. लेकिन उसमें गंदा पानी आता है कि इसलिए उन्हें नदी का पानी पीना पड़ता है. इसके अलावा अन्य कामों के लिए भी वे नदी के पानी का ही इस्तेमाल करते हैं.



ग्रामीण कुंवर बताते हैं कि गर्मी से ज्यादा बारिश के समय परेशानी होती है क्योंकि उस वक्त नदी का पानी ज्यादा गंदा होता है. पानी लाने में भी परेशानी होती है. ग्रामीण बिहानी व कलावती की मानें तो उनके गांव के सभी लोग नदी का पानी पीते हैं.

गंदा पानी पीने से गांव के लोग बीमार भी पड़ जाते हैं. ग्रामीण महिलाएं कहती हैं कि समस्या तो है लेकिन सुनने वाला कोई नहीं हैं. आरोप है कि प्रशासन ठीक से काम नहीं करता है. शायद इसलिए ही जिम्मेदारों को पता नहीं है कि कौन से गांव में क्या समस्या है.

बलरामपुर के जनपद पंचायत के सीईओ समुद्र साय और एसडीएम बी कुजूर का कहना है कि उन्हें पटना गांव की पानी की समस्या का पता ही नहीं है. जानकारी मिलने पर वे इसका निदान करवाएंगे.
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