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नक्सलियों के मंसूबे नाकाम, 56 टुकड़े होने के बावजूद 85% सुरक्षित है ढोलकल गणेश प्रतिमा

नक्सलियों के मंसूबे नाकाम, 56 टुकड़े होने के बावजूद 85% सुरक्षित है ढोलकल गणेश प्रतिमा

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध ढोलकल गणेश प्रतिमा खाई में गिरकर खंडित होने की घटना को पुरातत्व विभाग, जिला प्रशासन और ग्रामीणों ने बेहद गंभीरता से लिया है.

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध ढोलकल गणेश प्रतिमा खाई में गिरकर खंडित होने की घटना को पुरातत्व विभाग, जिला प्रशासन और ग्रामीणों ने बेहद गंभीरता से लिया है. प्राकृतिक आभा के बीच खुले पर्वत में स्थित गणेश की यह प्रतिमा समुद्र तल से 2994 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. पहले प्रतिमा के चोरी होने की अफवाह फैल गई थी.

बैलाडीला की दुर्गम पहाड़ी पर स्‍थापित है गणेशजी की दुर्लभ प्रतिमा

वरिष्ठ पुरातत्वविद् और पुरातत्व सलाहकार पद्मश्री डॉ. अरुण शर्मा शनिवार को दंतेवाड़ा पहुंचे और ढोलकल पहाड़ी से नीचे गिरकर खंडित हुई गणेश प्रतिमा का बारीकी से अवलोकन किया.

मूर्ति के 85 प्रतिशत भाग सुरक्षित

फरसपाल थाने में रखी गई खंडित मूर्ति को रेत से अरुण शर्मा ने एक बार फिर मूर्त रूप दिया. अरुण शर्मा का कहना है कि मूर्ति के 85 प्रतिशत भाग सुरक्षित हैं. इन टुकड़ों को उपचारित कर दोबारा मूर्ति तैयार की जा सकती है. इस मूर्ति की सुरक्षा गांव वालों को ही करना पड़ेगी. यह बेहद संवेदनशील क्षेत्र है, वहां पुरातत्व विभाग या प्रशासन सुरक्षा नहीं दे सकता है. यदि ग्रामीण इस मूर्ति को संरक्षण और सुरक्षा नहीं दे सकते हैं तो म्यूजियम में ही रखना सबसे उचित उपाय है.

'नक्सलियों ने नहीं, विदेशी ताकतों ने गिराई ढोलकल गणेश प्रतिमा' 

मूर्ति को देखने के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पहले मूर्ति पर हथौड़े से प्रहार किया गया है. इसके बाद भी जब मूर्ति नहीं टूटी तो इसको लोहे के रॉड से फंसाकर पहाड़ी से नीचे गिराया गया. मूर्ति के 56 टुकड़े हुए थे. लेकिन ऐसा कोई महत्वपूर्ण भाग गायब नहीं हुआ है जिससे मूर्ति का मूल रूप प्रभावित हो.

पुरातत्व और पर्यटन विभाग दोनों ही उपेक्षित

उन्होंने दंतेवाड़ा में बिखरी पड़ी मूर्तियों के संरक्षण के सवाल पर सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि पुरातत्व विभाग और पर्यटन एवं संस्कृति विभाग दोनों ही उपेक्षित हैं. इन विभागों की सिर्फ मीटिंग होती है, जिसमें अधिकारी-कर्मचारी और नेता समोसे-कचोरी खाकर औपचारिकता पूर्ण करते हैं.

ग्रामीणों ने ली प्रतिमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी

वहीं ढोलकाल घटना पर चर्चा के लिए शनिवार को ग्राम फरसपाल में पांच पंचायत के पंच, सरपंच मुखिया एवं मांझी पहुंचे थे. सभी ने ढोलकाल घटना की कड़े शब्दों में निंदा की. साथ ही इस दौरान सभी ग्रामीणों में एक सुर में कहा कि खंडित प्रतिमा को फिर से मूर्त रूप देकर वहीं स्थापित किया जाए. प्रशासन भी ग्रामीणों की बात से सहमत है. ग्रामीणों ने अधिकारियों से कहा कि पुरातन प्रतिमाएं उनकी धरोहर हैं. अब ढोलकल की प्रतिमा की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी सामूहिक रूप से ली जाएगी. इसमें प्रशासन ने भी ग्रामीणों को सहयोग करने का आश्वासन दिया है. प्रशासन ने इसके लिए कुछ मानदेय और सुविधा देने की बात भी ग्रामीणों से कही है.

नक्सलियों ने गिरायी ढोलकाल पहाड़ी पर स्थित ऐतिहासिक गणेश प्रतिमा

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा से 24 किलोमीटर दूर बैलाडीला की एक पहाड़ी का नाम है ढोलकल. यह स्थल बचेली वन परिक्षेत्र अंतर्गत ढोलकल शिखर पर दुर्लभ गणेश प्रतिमा फूलगट्टा वन कक्ष अंतर्गत है. समुद्र तल से इस शिखर की ऊंचाई 2994 फीट है. दक्षिण बस्तर के भोगामी आदिवासी परिवार अपनी उत्पत्ति ढोलकट्टा की महिला पुजारी से मानते हैं. क्षेत्र में यह कथा प्रचलित है कि भगवान गणेश और परशुराम का युद्ध इसी शिखर पर हुआ था. युद्ध के दौरान भगवान गणेश का एक दांत यहां टूट गया.

इस घटना को चिरस्थायी बनाने के लिए छिंदक नागवंशी राजाओं ने शिखर पर गणेश की प्रतिमा स्थापति की. चूंकि परशुराम के फरसे से गणेश का दांत टूटा था, इसलिए पहाड़ी की शिखर के नीचे के गांव का नाम फरसपाल रखा.

Tags: Dantewada news

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