विधानसभा चुनाव: भाजपा-कांग्रेस ने किए बस्तर में 100 फीसदी परिणाम का दावा

छत्तीसगढ़ में चुनावी विगुल बज चुका है. पहले चरण में बस्तर संभाग और राजनांदगांव जिले में चुनाव होना है. छत्तीसगढ़ में बस्तर को सत्ता की चाबी माना जाता रहा है.

Awadhesh Mishra | News18 Chhattisgarh
Updated: October 11, 2018, 1:43 PM IST
विधानसभा चुनाव: भाजपा-कांग्रेस ने किए बस्तर में 100 फीसदी परिणाम का दावा
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Awadhesh Mishra | News18 Chhattisgarh
Updated: October 11, 2018, 1:43 PM IST
छत्तीसगढ़ में चुनावी विगुल बज चुका है. पहले चरण में बस्तर संभाग और राजनांदगांव जिले में चुनाव होना है. छत्तीसगढ़ में बस्तर को सत्ता की चाबी माना जाता रहा है. साल 2003 और 2008 के चुनाव परिणाम को देखें तो पता भी चलता है कि जिसने बस्तर फतेह कर ली उसे सत्ता हासिल हो गई, लेकिन साल 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में यह मिथक टूटा और कांग्रेस बस्तर संभाग की 12 में से 08 सीटें जीतने के बाद भी सत्ता हासिल नहीं कर सकी.

इन सब के बीच एक बार फिर 2018 के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है. दोनों ही प्रमुख दल बीजेपी और कांग्रेस बस्तर में जोर आजमाइश को तैयार हैं. बात दावों कि करें तो दोनों दलों की ओर से 12 में से 12 सीटें का दावा किया जा रहा है. भाजपा के बस्तर प्रभारी सुनिल सोनी का कहना है कि बस्तर में इस बार भाजपा 100 फीसदी सीटें जीतेगी. जमीनी स्तर पर बस्तर में भाजपा सरकार ने काम किया है. इसका लाभ चुनाव में जरूर मिलेगा.

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दूसरी ओर कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री महेंद्र छाबड़ा का कहना है कि इस बार बस्तर की सभी 12 सीटें कांग्रेस के खाते में आएंगी. बस्तर में भाजपा सरकार ने पिछले 15 सालों में ऐसा कोई काम नहीं किया, जिससे वहां के लोगों को लाभ मिल सके. बस्तर में नक्सल समस्या और बढ़ी है. जनता ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने का मन बना लिया है. इसका लाभ चुनाव में मिलेगा.

भू-राजस्व सहिंता संसोधन विधेयक हो या नक्सल आतंक या फिर उद्योगों के नाम पर जमीनों का अधिग्रहण और उद्योग स्थापित न होना. ये तमाम ऐसे में मुद्दे हैं, जसके दम पर कांग्रेस 12 में से 12 सीटें जीतने का दावा कर रही है. बस्तर में अब तक हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम पर नजर डालें तो साल 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को चार सीटें भाजपा को मिलीं थी. जबकि कांग्रेस के खाते में 8 सीटें आईं. इससे पहले साल 2008 के चुनाव में भाजपा को 11 व कांग्रेस को एक सीट मिली थी. जबकि साल 2003 के चुनाव में भाजपा को 9 और कांग्रेस के खाते में तीन सीटें आईं थीं.

आकड़े बताने के लिए काफी है कि बस्तर में सियासी समीकरण बदलने के बाद प्रदेश में सत्ता परिवर्तन नहीं हो सका और यहीं वजह है कि तमाम राजनीतिक पंडित इस बार जनता के पाले में गेंद डालते हुए राजनीतिक दलों के दावों से ज्यादा इत्तेफाक नहीं रखते. राजनीतिक विश्लेषक रविकांत कौशिक का कहना है कि इस बार बस्तर की सीटों की अपनी अहमियत है, लेकिन पिछली बार की तरह इस बार भी पूरे छत्तीसगढ़ की जनता जिसके पक्ष में वोट करेगी, उसकी सरकार बनेगी.

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दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दल भले ही दावा सौ फीसदी परिणाम का कर रहे हों, लेकिन फिलहाल बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों ही प्रत्याशी चयन के चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं. क्योंकि इस बार मुकाबला करो या मरो जैसा दिखाई दे रहा है. बहरहाल देखना होगा की बस्तर की जनता किसे अपना सिरमौर चुनती है और प्रदेश में सरकार किसकी बनती है.

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