कर्ज वसूली के लिए जमीनों की कुर्की-नीलामी, किसान बोले- सुसाइड के अलावा कोई रास्‍ता नहीं

जमीन कुर्क किए जाने पर न्‍यूज18/ईटीवी के समक्ष अपना दर्द बयां करता किसान.

छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल जिले बस्तर के दरभा ब्‍लॉक के तीन गांवों के किसानों को कर्ज न चुका पाने के चलते प्रशासन ने जमीन कुर्की का नोटिस जारी कर दिया है.

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छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल जिले बस्तर जिले के दरभा ब्‍लॉक के तीन गांवों के किसानों को खेती-कि‍सानी के लिए कर्ज लेना महंगा पड़ गया है.

कर्ज नहीं चुका पाने के चलते प्रशासन ने किसानों को राहत देने के बजाय कुर्की का नोटिस जारी कर दिया है. चार किसानों की जमीन कुर्क भी कर ली है. इसके चलते किसान हैरान-परेशान हैं. उनका कहना है कि इन हालातों के चलते उन्‍हें आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.

जिला मुख्‍यालय से करीब साठ किलोमीटर दूर दरभा ब्लॉक के मावलीपदर, बोधराजु़नरा और केलाउर गांव के किसानों सहित आसपास के कई गांवों के किसानों ने दो साल पहले सरकार से खेती-किसानी के लिए कर्ज लिया था. कभी कम या ज्‍यादा बारिश, कभी विपरीत मौसम की मार तो कभी दूसरी परेशानियों के चलते हालातों से मजबूर किसान कर्ज नहीं पटा पाए.

मावलीपदर गांव के किसान बुधरू ने दो साल पहले खेती का काम अच्छे से हो सके, इस उद्देश्‍य से ट्रैक्टर खरीदने के लिए बैंक से लोन लिया था. बुधरू के मुताबिक कर्ज की कुछ रकम वह अदा नहीं कर पा रहा है. ऐसे में तहसीलदार ने उसके खेत में कुर्की का बोर्ड लगाकर जमीन को जब्ती में डाल दिया है. अब हताश-निराश बुधरू सरकार से इस फैसले से परेशान है. कल तक जिस खेत से वह बीस सदस्यों के परिवार का पेट पाल रहा था, वह खेत सरकार के कब्‍जे में चले जाने से बुधरू को मरने के आलावा कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आ रहा है.

पहले बच्‍चों को फांसी लगाऊंगी, फिर खुद को : जयमनी
जोधरापदर गांव की रहने वाली जायमनी की कहानी बुधरू से कुछ अलग है. उसके पति ने दो साल पहले सरकार से पचास हजार का कर्ज लिया था. जयमनी के मुताबिक कर्ज के लभगग पंद्रह हजार रुपए चुकाने के बाद पिछले फरवरी महीने में जयमनी के पति की मौत हो गई. अब वह मजदूरी करके अपने बच्चों को पाल रही है. जयमनी की ऐसी हालत नहीं है कि वह अपने पति द्वारा लिए गए कर्ज को पटा सके. कुली-मजदूरी करके जीवनयापन करने वाली जयमनी के पास भी कर्ज वसूली का नोटिस पहुंचा है. इसे लेकर वह भी मानसिक तौर पर परेशान है. जयमनी के मुताबिक अगर कर्ज के लिए सरकार माफी नहीं देती है, तो वह पहले अपने बच्चों को फांसी लगाएगी और फिर खुद भी जान दे देगी.

नीलामी की तारीख 18 जुलाई तय
किसानों की माली हालत पर तरस खाने के बजाय दरभा के तहसीलदार ने तीन गांवों के किसानों को कर्ज पटाने का नोटिस जारी कर दिया है. साथ ही कर्ज नहीं पटाने के चलते चार किसानों की करीब 28 एकड़ जमीन को भू-राजस्व संहिता की धारा 147 और 155 के तहत कुर्क किया जा चुका है. कुर्क की गई जमीन चूंकि अब शासन की हो चुकी है, ऐसे में एक माह के बाद 18 जुलाई को शासन ने जमीन की नीलामी तारीख भी मुकर्रर कर दी है. अगर बकायादार तय समय सीमा में कर्ज अदायगी नहीं करते हैं तो शासन ने उनकी जमीन नीलाम करने का मन बना लिया है.

और भी नोटिस जारी करने की तैयारी
उधर इस मामले में जमीन पर कुर्की का बोर्ड लगाने वाले दरभा तहसीलदार इसे सामान्य प्रक्रिया बताकर पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं. दरभा तहसीलदार शेखर मिश्रा का कहना हैँ कि बैंकों के बकाया कर्ज की वसूली के लिए अभी चार किसानों को नोटिस जारी किया गया है. कुछ और भी किसान हैं, जिन्हें नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है. कर्ज चुकाने के लिए किसानों को एक निश्चित समय सीमा दी गई है. अगर उसके बाद किसान कर्ज नहीं चुकाते हैं तो शासन के जो नियम हैं, उसके मुताबिक किसानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

तहसीलदार शेखर मिश्रा के मुताबिक शासन या उनके पास कोई अधिकार नहीं है, जिससे किसानों का कर्ज माफ किया जा सके. इसलिए किसानों को कर्ज तो चुकाना ही पड़ेगा.

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