खुद को आदिवासियों का हितैषी बताने वाली ये पार्टी 29 सीटों पर लड़ेगी चुनाव

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव 2018 सभी दलो के लिए खास बना हुआ है. सत्तादल भाजपा अपनी चौथी पारी खेलने के लिए हर तैयारी कर रही है.

Vinod Kushwaha | News18 Chhattisgarh
Updated: October 16, 2018, 5:56 PM IST
खुद को आदिवासियों का हितैषी बताने वाली ये पार्टी 29 सीटों पर लड़ेगी चुनाव
सांकेतिक फोटो:
Vinod Kushwaha | News18 Chhattisgarh
Updated: October 16, 2018, 5:56 PM IST
छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव 2018 सभी दलो के लिए खास बना हुआ है. सत्तादल भाजपा अपनी चौथी पारी खेलने के लिए हर तैयारी कर रही है. वहीं कांग्रेस 14 साल से वनवास से मुक्त होने में लगी है. इन दो प्रमुख दलों के अलावा ऐसे भी कई दल हैं, जो बस्तर में जोर आजमाइश में लगे हुये हैं. आदिवासी बाहुल्य बस्तर में आदिवासियों को साधने में हर कोई जुटा हुआ है. कोई अपने आप को आदिवासी का हितैषी बता रहा है तो कोई आदिवासियों के लिये योजनायें गिना रहा है, लेकिन इन सब के बावजूद आदिवासी वर्ग खासा नाराज दिखाई दे रहा है.

इस चुनाव में भारत ट्राईबल पार्टी के बैनर तले आदिवासी मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं. चुनावी बिगुल बज गया है और अब चरण वंदन के लिये नेता भी निकलने लगे हैं. सत्ता की कुंजी कहलाने वाली बस्तर में पहले चरण में मतदान होने वाला है. अभी तक दोनों प्रमुख पार्टियों ने अपने अपने प्रत्याशी तय तो नहीं किये हैं, लेकिन नेता पार्टी के लिये वोट मांगने में जुट गये हैं. बस्तर की 12 सीटों के लिये हर एक दल लगा हुआ है कि कैसे भी करके आदिवासियों को अपनी ओर खींच सकें, लेकिन बस्तर के सर्व आदिवासी समाज किसी भी पार्टी पर भरोसा नहीं जता रहा है. अब गुजरात की भारत ट्राईबल पार्टी के नाम से बस्तर में चुनाव लड़ने की इच्छा पार्टी के पदाधिकारियों ने जता दी है.



सर्व आदिवासी समाज और भारत ट्राईबल के पदाधिकारियों ने पूरे प्रदेश में आरक्षित 29 सीटों पर चुनाव में उतरने के लिये कमर कस ली है. वहीं सर्व आदिवासी समाज के उपाध्यक्ष राजाराम तोड़ेम ने कहा है कि भाजपा 15 सालों से विकास का दावा कर रही है. विकास कहां और किसका हुआ है, ये तो वे ही बता सकते हैं, लेकिन आदिवासी आज भी विकास के लिये तरस रहा है. न उन्हें बेहतर शिक्षा मिली और ना ही उन्हें बेहतर स्वास्थ सुविधाएं मिल सकी हैं. इतना ही नहीं न सड़क है, न ही बिजली है. इसलिए इस चुनाव में आदिवासी समाज खुद मैदान में उतरेगा.

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भाजपा के बस्तर प्रवक्ता संजय पांडेय का कहना है कि चुनाव आते ही कुछ लोग सक्रिय हो जाते हैं और चुनाव खत्म हो जाते ही गायब हो जाते हैं. सर्व आदिवासी समाज पहले भी भारतीय जनता पार्टी के साथ था और आगे भी रहेगा. इसकी आड़ में कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने में लगे हुये हैं. इससे भाजपा को कोई नुकासन नहीं होगा. वहीं कांग्रेस का भी यही मानना है कि 15 साल से आदिवासियों को केवल भाजपा ने छला है. जिससे आदिवासी भाजपा के खिलाफ हो गये हैं.

कांग्रेस के बस्तर जिलाध्यक्ष राजीव शर्मा का कहना है कि साल 2013 के चुनाव में कांग्रेस को बस्तर के सर्व आदिवासी समाज ने जो आर्शीवाद दिया था वो आगे 2018 में भी मिलेगा. बस्तर का आदिवासी शुरू से कांग्रेस के साथ है. आगे भी रहेगा. बहरहाल चुनावी फिजा में हर दल अपने आप को आदिवासी का हितैषी बता रहा है, लेकिन सच्चाई तो आदिवासी वर्ग ही जानता है कि उनका कितना विकास हुआ है. अब देखना ये होगा कि 12 नंवबर को किस दल को आदिवासी वर्ग साथ देता है.

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