छत्तीसगढ़: लोकसभा चुनाव में परेशानी का सबब बन सकते है माओवादी

चुनाव के दौरान माओवादी कई बड़ी वारदातों को अंजाम देने के फिराक में भी रहते है. ऐसे में पुलिस और चुनाव आयोग का सर दर्द माओवादी बढ़ा सकते है.

Mukesh Chandrakar | News18 Chhattisgarh
Updated: March 16, 2019, 1:06 PM IST
छत्तीसगढ़: लोकसभा चुनाव में परेशानी का सबब बन सकते है माओवादी
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Mukesh Chandrakar | News18 Chhattisgarh
Updated: March 16, 2019, 1:06 PM IST
छत्तीसगढ़ में माओवादियों का टीसीओसी शुरू हो चुका है. इसके साथ ही सूबे में लोकसभा चुनाव का आगाज भी गया है. गौरतलब हो कि माओवादी टीसीओसी के दौरान ज्यादा आक्रामक हो जाते है. माओवादी शुरू से ही चुनाव बहिष्कार करते आए है. चुनाव के दौरान माओवादी कई बड़ी वारदातों को अंजाम देने के फिराक में भी रहते है. ऐसे में पुलिस और चुनाव आयोग का सर दर्द माओवादी बढ़ा सकते है.

बता दें कि गर्मी की शुरुआत होते ही माओवादी टीसीओसी यानी टैक्टिस काउंटर ओफेंसिव कैंपेन शुरू करते है. इस दौरान माओवादी अपनी रणनीतियों में तब्दीलियां लाकर सुरक्षाबल के जवानों पर आक्रामक हमले करते है. देखा जाए तो माओवादी अधिकांश तमाम बड़े हमलों को गर्मी के दिनों में ही माओवादियों ने अंजाम दिया है.

एक नजर उन बड़े हमलों पर जिन्हें माओवादियों ने गर्मी के दिनों में यानी की टीसीओसी के दौरान दिया है.



दिनांक- 15 मार्च 2007,

जगह- पुलिस कैंप, रानीबोदली, जिला बीजापुर
हमले में 55 जवान शहीद हुए

दिनांक- 29 जून 2010
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जगह- दोडई, जिला- नारायणपुर
हमले में 27 जवान शहीद हुए

दिनांक- 17 मई 2010
जगह- यात्री बस में सवार होकर दंतेवाडा से सुकमा जा रहे जवानों पर माओवादियों ने बारूदी सुरंग से विस्फोट किया
इस विस्फोट में 12 पुलिस जवानों सहित 36 आम लोग भी मारे गए..

दिनांक- 16 अप्रैल 2010
जगह- ताडमेटला, जिला-सुकमा
सर्चिंग पर निकले सी आर पी एफ के 76 जवान शहीद

दिनांक- जून 2011
जगह- दंतेवाडा
एंटी लैंड माइंस वेहिकल में बारूदी सुरंग में विस्फोट किया, विस्फोट इतना सशक्त और शक्तिशाली था कि एंटी लैंड माइंस वेहिकल में सवार सभी 10 सुरक्षाबल के जवान मौके पर ही शहीद हो गये..

दिनांक- 12 मई 2012
जगह- सुकमा
दूरदर्शन केंद्र में हमला, 4 जवान शहीद

दिनांक- 25 मई 2013
जगह- सुकमा
कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला, हमले में कांग्रेस के दिग्गज नेता महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल और विद्या चरण शुक्ल समेत 30 से अधिक लोग और जवान मारे गये..

दिनांक- 11 मार्च 2014
जगह- झीरम
15 जवान शहीद

गर्मी के शुरू होते ही लोकसभा चुनाव का भी आगाज़ हो चुका है. गौरतलब हो कि लोकतंत्र विरोधी माओवादी चुनाव का बहिष्कार करते हुए चुनाव में खलल डालने के उद्देश्य से बड़े हमलों को अंजाम देते है. ऐसे में पुलिस और चुनाव आयोग के सामने माओवादियों से निपटते हुए चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना बहुत बड़ी चुनौती होगी. बस्तर के वरिष्ठ पत्रकार रंजन दास की माने तो माओवादियों के टीसीओसी से निपटते हुए लोकसभा चुनाव संपन्न कराना चुनाव आयोग के लिए दोहरी चुनौती साबित होगी.

वहीँ बीजापुर के नव नियुक्त पुलिस कप्तान गोवर्धन ठाकुर का कहना है कि सुरक्षाबल के जवान पूरी तरह से मुस्तैद है. समय के साथ पुलिस अपनी रणनीतियों में बदलाव लाती है. लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अभी से ही इलाके की सर्चिंग की जा रही है.

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