तेंदूपत्ता ठेकेदारों तक बढ़ी हुई दर से वसूली करने का संदेश पहुंचाने में जुटे नक्सली

लाल आतंक के गढ़ बस्तर में हरा सोना यानी तेंदूपत्ता की तोड़ाई शुरू हो चुकी है. तेंदूपत्ते की तोड़ाई के साथ ही नक्सल संगठन भी सक्रिय हो गया है.

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छत्तीसगढ़ में लाल आतंक के गढ़ बस्तर में हरा सोना यानी तेंदूपत्ता की तोड़ाई शुरू हो चुकी है. तेंदूपत्ते की तोड़ाई के साथ ही नक्सल संगठन भी सक्रिय हो गया है. सरकार ने जहां तेंदूपत्ता प्रति मानक बोरे की दर बढ़ा दी है, वहीं माओवादी संगठन भी इस बार मानक बोरा के हिसाब से बढ़ी हुई दर से वसूली करने का संदेश तेंदूपत्ता ठेकेदारों तक पहुंचा रहे हैं.

आपकों बता दें कि हर साल माओवादी संगठन बस्तर से हरे सोने (तेंदूपत्ता) के जरिए होने वाली अवैध वसूली से करोड़ों रुपए की लेवी वसूलते हैं. इस लेवी के सहारे पूरे देश का नेटवर्क माओवादी संगठन चलाते हैं. तेंदूपत्ता के सीजन में माओवादियों को आथिर्क फायदा पहुंचाने का बस्तर सबसे बड़ा केंद्र है. तीन दशक से माओवादियों की ये वसूली जारी है, लेकिन अब तक इस पर रोक लगाने में पुलिस या सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है.

बस्तर संभाग में तेंदूपत्ता का सीजन शुरू होते ही माओवादियों की लेवी वसूलने का मौका भी शुरू हो चुका है. बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादियों ने कहीं पर पर्चे फेंककर तो कहीं ठेकेदारों को फरमान जारी कर तेंदूपत्ता की प्रति मानक बोरा की दर बढ़ाने के लिए कहा है. तेंदूपत्ता के फंड काम करने वाले मुंशियों को भी माओवादियों ने फरमान जारी किया है. साथ ही फरमान नहीं मानने वाले को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है.



लोग माओवादियों के इस फरमान को लेकर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं. वहीं एक फड मुंशी ने अपनी पहचान छुपाते हुए माओवादियों के फरमान को लेकर बातचीत की. फड मुंशी के मुताबिक नक्सल प्रभावित एक तेंदूपत्ता के फड में कुछ समय पहले पहुंचे माओवादियों ने मानक बोरे की दर बढ़ाए जाने का फरमान जारी किया है.
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नक्सल एक्सपर्ट मनीष गुप्ता की मानें तो बस्तर में तेंदूपत्ता से माओवादियों तक पहुंचने वाला एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी के माध्यम से जाता है. वसूली का ये सिलसिला बस्तर में हर साल तेंदूपत्ता के सीजन के
समय होता है. इस वसूली के अलावा माओवादी तेंदूपत्ता संग्राहकों से एक दिन की मजदूरी दान करने की अपील भी कर रहे हैं.

वहीं इस बार भी बस्तर रेंज के आईजी विवेकानंद सिन्हा ने दावा किया है कि पिछले कुछ समय से कुछ ऐसे तरीके अपनाएं जा रहे हैं कि माओवादियों द्वारा की जा रही वसूली पर रोक लगी है. बहरहाल, अब देखना यही है कि इस बार सुरक्षा एजेंसियां हरे सोने की आड़ में लाल आतंक द्वारा की जाने वसूली को कितनी रोक पाती है.

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