कहीं नक्सल विरोधी नारे...तो कहीं चुनाव बहिष्कार..ऐसा रहा इन सीटों पर पहले चरण का मतदान
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कहीं नक्सल विरोधी नारे...तो कहीं चुनाव बहिष्कार..ऐसा रहा इन सीटों पर पहले चरण का मतदान
संवेदनशील इलाकों में भी लोगों ने किया बढ़-चढ़कर मतदान

कांकेर,दंतेवाड़ा जैसे संवेदनशील इलाकों में मतदान के लिए लोगों में काफी उत्साह दिखा. दंतेवाड़ा में कई ऐसे इलाके था जहां पहली बार मतदान हो रहा था. यहां लोगों ने नक्सल फरमान को दरकिनारे कर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया.

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छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के लिए 10 सीटों पर मतदान की समय सीमा खत्म हो गई है. बाकी की 8 सीटों पर भी वोटिंग की समय सीमा खत्म होने वाली है. नक्सल प्रभावित इलाकों में मतदान की समय सीमा दोपहर 3 बजे तक खत्म हुई . बाकि इलाकों में शाम 5 बजे तक मतदान की समय सीमा निर्धारित की गई है. मोहला मानपुर,अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, कांकेर, केशकाल, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, और कोंटा इन 10 सीटों पर सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक मतदान हुआ. खैरागढ़, डोंगरगढ़, राजनांदगांव, डोंगरगांव, खुज्जी,बस्तर, जगदलपुर और चित्रकूट इन 8 सीटों पर सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान की समय सीमा रखी गई थी. अब इन सीटों पर 12 दिसंबर को परिणाम आएंगे.

छत्तीसगढ़ संवेदनशील इलाकों की बात करे तो वोटिंग का समय खत्म हो गया है. कुछ नक्सल वारदातों के साथ 8 सीटों पर पहले चरण का मतदान का समय समाप्त हुआ. कांकेर,दंतेवाड़ा जैसे संवेदनशील इलाकों में मतदान के लिए लोगों में काफी उत्साह दिखा. दंतेवाड़ा में कई ऐसे इलाके था जहां पहली बार मतदान हो रहा था. यहां लोगों ने नक्सल फरमान को दरकिनारे कर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया.

दंतेवाड़ा के निलावाया में हुआ पहली बार मतदान, पड़े 17 वोट



छत्तीसगढ़ के संवेदनशील इलाकों में से एक दंतेवाड़ा दंतेवाड़ा जिले में मतदान की समय सीमा खत्म हो गई है. दंतेवाड़ा के कई ऐसा इलाके है जहां पहली बार लोगों ने मतदान किया.  मुलेर ,निलावाया, जबेली ,किकिर पारा पोटाली और बुरगुम में पहली बार मतदान हुआ. जबेली में 11 , समेली में 234 , बुरगुम में 7 ,माड़ेन्दा में 167, निलावाया में 17, किकिर पारा में 13 ,अरनपुर में 50 ,काकाड़ी में 9 मेड़पाल में 4 ,मुलेर में 10 वोट पड़े
पोलिंग बूथ में लगे नक्सल विरोधी नारे

छत्तीसगढ़ में हो रहे विधानसभा चुनाव का नक्लसी शुरू से विरोध करते आए है. अंदरूनी इलाकों में नक्सलियों ने बैनर-पोस्टर लगाकर लोगों को चुनाव बहिष्कार करने का फरमान सुनाया था. मतदाताओं को डराने के लिए कई इलाकों में नक्सलियों ने ब्लास्ट भी किया. लेकिन इसके ठीक विपरित दंतेवाड़ा के कलेपाल बूथ में लोगों ने नक्सल विरोधी नारे लगाए. नारों के बीच बढ़-चढ़कर लोगों ने मतदान किया.

कांकेर में ग्रामीणों ने किया चुनाव बहिष्कार

छत्तीसगढ़ में पहले चरण के मतदान में लोगों में काफी उत्साह दिखा. लोगों ने बढ़-चढ़कर मतदान में भाग लिया. लेकिन इसके ठीक विपरित कांकेर विधानसभा के रवस, आमापानी, पर्रेदोरा, निशानहर्रा के ग्रामीणों ने किया चुनाव का बहिष्कार, बिना सूचना दिए पोलिंग बूथ को बदल कर अन्य स्थान पर किए जाने से ग्रामीण काफी नाराज हुए. इन मतदान केंद्रों में ग्रामीणों ने वोटिंग ही नहीं की.  कांकेर के सरोना क्षेत्र का ये पूरा मामला है.

कोण्डागांव में लाल आतंक के खिलाफ एकजुट हुए लोग

छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले में नक्सलियों ने सीरे से विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया. नक्सलियों ने दीवारों में चुनाव बहिष्कार का फरमान तक लिख दिया. लेकिन लोगों ने इस नक्सली फरमान को दरकिनार करते हुए मतदान किया.  अतिसंवेदनशील तुमड़ीवाल में वोट की संख्या 100 के पार पहुंची. पिछले चुनाव में इस इलाके में महज 15 वोट पड़े थे.  मर्दापाल के मटवाल गांव में लोगों में चुनाव के प्रति काफी उत्साह दिखा.

पिछले बार के मुकाबले इन सीटों पर हुआ कम मतदान

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और कांकेर में पहले चरण के मतदान की समय सीमा खत्म हो गई है. कांकेर की बात करें तो कांकेर विधानसभा में कुल 62 प्रतिशत मतदान हुआ. भानुप्रतापपुर विधानसभा में 57 प्रतिशत और अंतागढ़ विधानसभा में 43 प्रतिशत मतदान हुआ. 2013 में हुए विधानसभा चुनाव की तुलना करें तो इस बार कांकेर में 25 प्रतिशत कम मतदान हुआ. दंतेवाड़ा की बात करें तो कुल 50 से 55 प्रतिशत मतदान जिले में हुआ. 2013 में दंतेवाड़ा में 62 प्रतिशत मतदान हुआ था.

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