चुनाव के दौरान बस्तर में बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं नक्सली

नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में जिस तादात में हथियार व आईईडी बरामद किए गए हैं, उससे आशंका जताई जा रही है कि नक्सली चुनाव के दौरान किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं.

Vinod Kushwaha | News18 Chhattisgarh
Updated: October 11, 2018, 4:53 PM IST
Vinod Kushwaha | News18 Chhattisgarh
Updated: October 11, 2018, 4:53 PM IST
छत्तीसगढ़ के बस्तर में पहले चरण में चुनाव होना है. पिछले कुछ दिनों से नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में जिस तादात में हथियार व आईईडी बरामद किए गए हैं, उससे आशंका जताई जा रही है कि नक्सली चुनाव के दौरान किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं. इसके अलावा जो सामान सुरक्षाबल सर्चिंग के दौरान बरामद कर रहे हैं, उससे भी इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि माओवादी संगठन सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने की साजिश रच रहे हैं.

चुनाव की रणभेरी के बीच शासन प्रशासन चुनाव आयोग समेत सुरक्षा एजेसियां चुनाव कराने की तैयारी में जुटी हुई हैं. मैदानी इलाकों में चुनाव को लेकर कहीं कोई खतरे की आशंका नहीं है, लेकिन लाल आतंक का गढ़ कहलाने वाले बस्तर में चुनाव कराना चुनाव आयोग के साथ ही सुरक्षा एजेसियों और स्थानीय शासन प्रशासन के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती बना हुआ है.

आम तौर पर नक्सली चुनाव के समय हिंसा फैलाते हैं. इस बार भी माओवादी कुछ ऐसी ही साजिशें रच रहे हैं. बस्तर रेंज के आईजी की मानें तो नक्सल इलाकों से सुरक्षा बलों को पंपलेट्स और आतंक फैलाने वाले जो सामान मिल रहे हैं, उससे इस बात की पुष्टि हो रही है कि आने वाले दिनों में नक्सली कोई बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं. हालांकि मामले में बस्तर आईजी विवेकांनद सिन्हा का कहना है कि सुरक्षा बल के जवान बस्तर में मुस्तैद हैं. किसी भी साजिश का मुहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं.



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बीते सप्ताह भर में सुकमा इलाके में सुरक्षा बलों को बड़ी मात्रा में प्रेशर आईईडी, माइक्रो आईईडी के अलावा स्पाइक होल बड़ी मात्रा में मिले हैं. इसके साथ ही नक्सलियों ने अपने टीसीओसी (टेक्टिकल काउंटर आॅफेंसिव कैंपेन) को दिसंबर तक के लिए आगे बढ़ा दिया है, जिससे साफ है कि चुनाव को देखते हुए नक्सल संगठन ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है.

बस्तर के संवेदनशील इलाकों में जहां सुरक्षाबलों को काफी ज्यादा खतरा है, ऐसे इलाकों की सुरक्षा एजेसियों को एहतिहात बरतने के निर्देश दिए गए हैं. बस्तर में चुनाव के दौरान होने वाली हिंसा को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने पहले चरण में बस्तर में चुनाव कराने का फैसला लिया है. यानि प्रदेश के दूसरे हिस्सों में तैनात होने से सुरक्षा कम्पनियों की पूरी ताकत को बस्तर में लगाने की तेयारी जारी है.

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बस्तर में पहले से ही पचास से साठ हजार के आसपास सुरक्षा कम्पनियों के जवान नक्सलियों से लोहा ले रहे है. चुनाव को देखते हुए तीन सौ के आसपास और सुरक्षा कम्पनियों की बस्तर में तैनाती शुरू हो चुकी है. जिस लिहाज से सुरक्षा एजेसियों की तैनाती बस्तर में हो रही है, उससे साफ है कि बस्तर में सुरक्षा छावनी के बीच चुनाव सम्पन्न कराए जाने के लिए आयोग तैयार है. अब देखना है कि इस कड़ी तैयारी में चुनाव आयोग कितना सफल हो पाता है.

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