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आर्थिक तंगी से जूझ रहे नक्सल संगठन करवा रहे हैं गांजे की तस्करी!

आर्थिक तंगी से जूझ रहे नक्सल संगठन करवा रहे हैं गांजे की तस्करी!

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

छत्तीसगढ़ के पड़ोसी प्रांत ओडिशा से बस्तर के रास्ते होने वाली गांजे की तस्करी नक्सलियों की मदद से हो रही है.

आर्थिक तंगी से जूझ रहे नक्सल संगठन के अब धन जुटाने के लिए गांजे की तस्करी से जुड़े होने की बातें सामने आ रही हैं. माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ के पड़ोसी प्रांत ओडिशा से बस्तर के रास्ते होने वाली गांजे की तस्करी नक्सलियों की मदद से हो रही है. नक्सल मामलों के जानकार भी ये मान रहे हैं कि गांजे की इंटरस्टेट तस्करी में कहीं न कहीं नक्सलियों का हाथ हैं. गांजे की तस्करी में नक्सली किस तरह से मदद गार बने हुए हैं. इसकी जानकारी सुरक्षा एजेसियों के पास भी पहुंची है, जिसके बाद सुरक्षा एंजेसिंया अब अपने स्तर से इसकी जानकारी जुटाने में लगी हुई हैं.

बस्तर में लंबे समय से नक्सलियों के संरक्षण में बड़े पैमाने पर गांजे की तस्करी की जा रही है. दरअसल छत्तीसगढ़ के पड़ोसी प्रांत ओडिशा के मलकानगिरी में बड़े पैमाने पर गांजे की खेती और तस्करी किए जाने का कारोबार फल फूल रहा है. गांजे की तस्करी के लिए बस्तर का रास्ता काफी ज्यादा तस्करों के लिए मुफीद माना जाता है. बस्तर के रास्ते गांजा जब बिहार, दिल्ली, कोलकाता, महाराष्ट्र, सहित मध्यप्रदेश भेजा जाता है, तब कई बार सुरक्षा एंजेसियां इसपर कार्रवाई भी करती हैं.

अब सुरक्षा एजेंसियों के पास ऐसी खबरें आ रही हैं कि नक्सल संगठन पिछले लंबे समय से आथिर्क संकट से जूझ रहे हैं. ऐसे में धन बल को मजबूत करने के लिए कहीं न कहीं नक्सलियों के इशारे पर गांजे की खेती हो रही है. इस इनपुट को आधार बनाकर सुरक्षा एजेसियां फिलहाल कुछ सूबूतों को जुटाने में लगी हैं. बस्तर आईजी विवेकानंद सिन्हा का कहना है कि गांजे की अवैध तस्करी में नक्सलियों की भूमिका से जुड़े सबूत जुटाए जा रहे हैं.

नक्सल मामलों के जानकार मनीष गुप्ता का कहना है कि आम तौर पर नक्सली शराब और दूसरी अन्य बातों को लेकर जब तब अपना फरमान जारी करते रहते हैं, लेकिन गांजे के मामले में आज तक माओवादियों ने किसी तरह का कोई फरमान या उससे जुड़े कारोबारियों पर कोई रोक टोक नहीं लगायी है, जिससे ये साफ है कि गांजा तस्करी में कहीं न कहीं नक्सलियों का हाथ है.

अकेले जगदलपुर जिले में बीते साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो 24 हजार किलो गांजा पकड़ा गया है. एनडीपीएस में कुल 97 मामले दर्ज किए गए हैं. इसके साथ ही कोर्ट के आदेश के बाद बस्तर में अलग अलग थानों पर रखा करीब 773 किलो गांजे को जलाया भी गया है. साथ ही बस्तर संभाग में साल 2018 में गांजे के 47 हजार 482 प्रकरण दर्ज किए गए हैं. इन आंकड़ों से साफ है कि इतने बड़े पैमाने पर गांजे की तस्करी के पीछे नक्सलियों का हाथ है.
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Tags: Bastar news, Chhattisgarh news, Naxal violence

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