माओवाद के खात्मे के लिए अधिकारी ले रहे सोशल साइट्स का सहारा
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माओवाद के खात्मे के लिए अधिकारी ले रहे सोशल साइट्स का सहारा
सांकेतिक तस्वीर

सोशल साइट्स के सहारें पुलिस माओवादियों को खत्म करने और उनके समथर्कों को अपना रास्ता बदलने की नई राह पर काम कर रही है. साउथ बस्तर के डीआईजी ने अपने फेशबुक पेज पर माओवादी समथर्कों को चेतावनी दी है.

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छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में तीन दशकों से भी ज्यादा समय से पनपी नक्सल समस्या को खत्म करने लिए सरकार ओर सुरक्षा एजेसियां हर स्तर पर लड़ाई लड़ रही है. विकास के लकीरें खीचने के साथ ही सुरक्षा बल जंगल के अंदर लाल आतंक को खत्म करने की लड़ाई लड़ रहे है. सुरक्षा से जुड़े आला अधिकारियों के मार्ग दशर्न में लगातार ऑपरेशन चलाए जा रहे है. इस बीच सोशल साइट्स के सहारें पुलिस माओवादियों को खत्म करने और उनके समथर्कों को अपना रास्ता बदलने की नई राह पर काम कर रही है. साउथ बस्तर के डीआईजी ने अपने फेशबुक पेज पर माओवादी समथर्कों को चेतावनी दी है और उनसे अपील भी की है वे लाल आतंक का रास्ता छोड दे. वरना जो भी माओवादियों की मदद करने वाले सुरक्षा एजेसियों के राडार में आ रहे है उनके खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी.

बस्तर में पैर पसारे नक्सलवाद की जड़ों को काटने के लिए अब बस्तर पुलिस ने सोशल साइट्स के साथ अपने संचार प्रणाली के जरिए माओवादियों से लड़ने की एक नई रणनीति तैयार की है. आम तौर पर माओवादियों से मुख्य धारा में शामिल होने की अपील सरकार से लेकर सु़रक्षा एजेसियों के अफसर जब तब करते रहे है. अब बस्तर डीआईजी रतन लाल डांगी ने अपने फेसबुक पेज के जरिए माओवादी समथर्कों को चेतावनी जारी की और अपील भी की है कि ऐसे लोग जो जाने में या अनजाने में लाल आतंक की मदद कर रहे हैँ उन्हें अपना रास्ता बदल लेना चाहिए.

बस्तर डीआईजी रतन लाल डांगी ने कहा कि माओवादी समथर्कों को ये सोचना चाहिए कि जो लोग जंगल में सुरक्षा बल के जवानों से छिप रहे है,निर्दोष लोगों की हत्या कर रहे है, ऐसे लोगों के हाथों में अगर जिले की कमान आ गई तो वे किस तरह का आतंक फैलाएंगें. ऐसे कई सवालों की तरफ इशारा करते हुए डीआईजी ने कहा है कि ऐसे लोग जो जाने या अनजाने में माओवादियों की मदद कर रहे है उन्हे अब आतंक फैलाने वाले लोगों से हाथ मिलाना बंद कर देना चाहिए.
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