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'रात 12 बजे के बाद पहरा लगाकर बम लगाते हैं माओवादी'

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर के जगदलपुर जिले के बास्तानार घाट में सीआरपीएफ और कोडेनार पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान 8 साल पहले लगाए गए 50 किलोग्राम का इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बम बरामद किया है.

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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर के जगदलपुर जिले के बास्तानार घाट में सीआरपीएफ और कोडेनार पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान 8 साल पहले लगाए गए 50 किलोग्राम का इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बम बरामद किया है.

यह बम किसी समय में सुरक्षा जवानों की जान का दुश्मन बना आत्मसमर्पित माओवादी रमेश ने ही लगाया था.

साल 2013 में नारायणपुर पुलिस के समाने आत्मसमर्पण करने वाले रमेश को पुलिस ने डीआरजी की फोर्स में शामिल किया, जिसके बाद रमेश लगातार पुलिस को ऐसी जानकारियां दे रहा है, जिससे जवानों की जान तो बच रही है.

आत्मसमर्पित माओवादी रमेश के मुताबिक नक्सल संगठन में बम को प्लांट करने और उसे लगाने की ट्रेनिंग आंध्रप्रदेश के नक्सली छत्तीस उर्फ सतीश ने दी थी. उसने बताया कि सतीश बम बनाने और लगाने में एक्सपर्ट है.

आत्मसमर्पित माओवादी रमेश ने बताया कि पूरे प्रदेश के नक्सल प्रभावित इलाकों में बम लगाने के लिए आठ लोगों का अलग अलग दल बनाया गया था. बम लगाने वालों में रमेश खुद भी शामिल था.

रमेश ने अपने साथियों की मदद से बास्तानार में पांच दिनों की मेहनत के बाद यह बम लगाया था. उसके मुताबिक लोगों को इसकी खबर न लगे इसलिए बम लगाने का काम रात के 12 बजे के बाद किया जाता था.

रमेश के मुताबिक दोनों ओर संतरी पहरा देकर के इस बम को लगाया गया था. इसके अलावा जगदलपुर कोडगांव, जगदलपुर नारायणपुर, जगदलपुर बनियागांव जैसे इलाके में भी रमेश बम लगा चुका है.

आत्मसमर्पित माओवादी के अनुसार कुछ बम उसके द्वारा विस्फोट भी किए गए, लेकिन किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा क्योंकि ये बम गलती से फटे थे.

बम के लिए बारूद कौन सप्लाई करता है और कहां से यह बारूद आता है इस बारे में उसे कुछ ज्यादा जानकारी नहीं हैं उसे सिर्फ इतना ही मालूम है कि बारूद नक्सलियों की इंटलीजेंस प्रभारी तक पहुंचता है और उसके बाद बम बनाने का काम किया जाता है और फिर मिलिट्री कम्पनी के इशारे पर बम को लगाया जाता है.

गौरतलब है कि ये पहला मौका है जब बम को लगाने और उसे प्लांट करने की जानकारी सामने आई है.

सुरक्षाबलों को किसी बडे खतरे से बचाने के लिए रमेश को पुलिस अधीक्षक के द्वारा दस हजार रूपए इनाम के रूप में दिए गए हैं.

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