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Valentine's Week Special: कहानी बस्तर के उस लव-कपल की, जिन्हें भगवान की तरह पूजते हैं आदिवासी

Vinod Kushwaha | News18 Chhattisgarh
Updated: February 13, 2020, 1:09 PM IST
Valentine's Week Special: कहानी बस्तर के उस लव-कपल की, जिन्हें भगवान की तरह पूजते हैं आदिवासी
परम्पराओं और रीति—रिवाजों में पली-बढ़ी और बसी है झिटकू-मिटकू की अमर प्रेम कहानी. सांकेतिक फोटो.

वेलेंटाइन वीक (Valentine's Week) में पढ़िए छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बस्तर (Bastar) की झिटकू और मिटकू की अमर प्रेम कहानी (Love Story), जिन्हें लोग भगवान की तरह पूजते हैं.

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बस्तर. रोज-डे, चॉकलेट-डे जैसे अलग-अलग दिनों को सेलिब्रेट कर वेलेंटाइन वीक (Valentine's Week) मनाने की खबरों के बीच, आपको हम ले चलते हैं छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के आदिवासी बहुल इलाके बस्तर (Bastar) की ओर, जहां प्रेम की एक अद्भुत कहानी (Love Story) आज भी जिंदा है. बस्तर में रीति-रिवाज और परंपराएं आज भी लोगों के बीच उसी रूप में पल-बढ़ रही हैं, जैसी सैकड़ों साल पहले हुआ करती थीं. इन्हीं परंपराओं और रीति-रिवाजों में पली-बढ़ी और बसी है झिटकू-मिटकू की अमर प्रेम कहानी. ये अमर प्रेम कथा (Love Story) आज भी बस्तर के लोक संगीत (Folk Music) से लेकर कथा-कहानियों में तो गूंजती ही है. साथ ही दो प्रेमियों के एक-दूसरे प्रति समर्पण को लोग आस्था के साथ पूजते भी हैं.

500 साल पुरानी कहानी
यह कहानी है बस्तर के झिटकू-मिटकू की, जिनकी अमर प्रेम कहानी आदिवासी अंचल में रची-बसी है. बस्तर के इन दो प्रेमियों- झिटकू और मिटकू का जन्म यूं तो बस्तर में ही हुआ, लेकिन किस गांव में ये लोगों को पता नहीं है. कहानी कुछ ऐसी है कि आज से करीब 500 साल पहले बस्तर के किसी गांव में झिटकू और मिटकू दो प्रेमी हुआ करते थे. कहते हैं कि दोनों की मुलाकात एक मेले में हुई. दोनों थे तो एक ही जाति समुदाय के, लेकिन जब विवाह करने की बात आई तो उसमें विवाद खड़ा हो गया.

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झिटकू और मिटकू की मूर्ति बस्तर के कलाकार बनाते हैं.


सात भाइयों में एक बहन थी मिटकू
जगदलपुर के इतिहास के जानकार हेमंत कश्यप बताते हैं कि मिटकू सात भाइयों में एक बहन थी. भाइयों का प्रेम इतना था कि वे अपनी बहन को कभी भी आंखों से दूर नहीं देख सकते थे. ऐसे में जब बहन की शादी का सवाल उठा, तो भाइयों ने झिटकू के सामने शर्त रखी कि मिटकू के साथ शादी करने के बाद वह उनके घर में घर-जंवाई बनकर रहे. खुद्दार झिटकू को ये पसंद नहीं था, लेकिन अपने प्यार को वह खो नहीं सकता था. ऐसे में बाद में ये सहमति हुई कि झिटकू घर-जंवाई न बनकर गांव में ही रहेगा, लेकिन अपना एक अलग घर बनाकर. ऐसा ही हुआ.

इस हादसे ने बदली तकदीरहेमंत कश्यप बताते हैं कि एक समय झिटकू और मिटकू की जिंदगी में ऐसा मोड़ आया, जब गांव में भयंकर अकाल पड़ा. लोग दाने-दाने को मोहताज हो गए. गांव के खेत-खलिहान और तालाब सब सूख गए. ऐसे में गांव में एक बैठक हुई जिसमें ये तय हुआ कि अगर गांव के सभी लोग मिलकर एक तालाब खोद लें तो सिंचाई का एक साधन हो जाएगा. बैठक में तय निर्णय के मुताबिक तालाब खोद लिया गया, लेकिन गांव वालों के सामने एक नई समस्या फिर खड़ी हो गई. वह ये कि जब तक बारिश नहीं होगी, तालाब भरेगा कैसे?

वैलेंटाइन के प्यार भरे सन्देश
सांकेतिक फोटो.


जिंदगी खत्म करने का षड्यंत्र
ऐसे में किसी गांव वाले ने ये सलाह दी कि बारिश के लिए गुनिया (तांत्रिक या बैगा) की शरण में जाया जाए. गांव वाले गुनिया की शरण में पहुंचे, जहां गुनिया ने कहा कि गांव के किसी एक व्यक्ति की बलि देने से बारिश होगी. बलि का नाम सुनते ही गांव वाले पीछे हट गए, लेकिन गांव के ही कुछ लड़के जो मिटकू की शादी हो जाने से झिटकू से ईर्ष्या करते थे, उन्होंने साजिश रची. इन लड़कों ने मिटकू के भाइयों को सलाह दी कि क्यों न झिटकू की बलि दे दी जाए. वैसे भी झिटकू इस गांव का नहीं है, अगर ये काम कर दिया जाएगा तो भाइयों का बहुत नाम होगा. इसके बाद अकेली मिटकू की शादी गांव के ही किसी लड़के के साथ करा दी जाएगी.

तालाब के पास ही दे दी बलि
गांव के लड़कों की बात मिटकू के भाइयों को जम गई और उन्होंने वैसा ही करने का षड्यंत्र रचा. एक शाम जब झिटकू गाय चराकर अपने घर लौट रहा था, मिटकू के भाइयों ने उस पर हमला बोल दिया. अपनी जान बचाकर झिटकू भागता रहा. मिटकू के भाइयों ने कुल्हाड़ी से झिटकू पर वार किया. कुल्हाड़ी झिटकू के पैर में लगी, फिर भी वह उनके हाथ नहीं आया. आखिर में झिटकू उसी तालाब के पास पहुंचा, जो अकाल से मुक्ति के लिए गांव वालों ने खोदा था. तालाब के पास आकर झिटकू की हिम्मत जवाब दे गई और मौका पाकर मिटकू के भाइयों ने कुल्हाड़ी से झिटकू का गला काट दिया. कुल्हाड़ी के वार से झिटकू का धड़ तालाब के किनारे गिर गया और गर्दन तालाब में जा गिरी. संयोग से उसी समय बारिश भी हुई और तालाब भर गया.

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गांव में तालाब किनारे बना मंदिर.


..तो सपने में दिखी घटना
हेमंत कश्यप बताते हैं दिनभर झिटकू का रास्ता देखकर मिटकू को नींद आ गई. नींद में मिटकू ने अपने पति के साथ हुई घटना को सपने में देखा. अचानक उसकी नींद खुली और भागकर तालाब के पास पहुंची. जहां उसने देखा झिटकू तालाब के बीच गर्दन तक पानी में डूबा हुआ खड़ा है. मिटकू ने उसे डांटते हुए वापिस घर चलने को कहा. तब झिटकू ने सारा घटनाक्रम मिटकू को बताया. अपने प्यार को खो चुकी मिटकू ने उसी तालाब में कूद कर जान दे दी. दूसरे दिन गांव वालों को मिटकू की लाश तालाब में तैरती मिली. बस उसके बाद से झिटकू और मिटकी की प्रेम कहानी अमर हो गई.

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बस्तर के एक गांव चिलकुटी में ग्रामीण झिटकू-मिटकू की मूर्तियां बनाते हैं.


ग्रामीणों के लिए बन गए भगवान
बस्तर के लोग आज भी झिटकू को खोडिया राजा यानी गाय चराने वाला और मिटकू को घपादाई जिसे धन-धान्य की देवी कहा जाता है, के रूप में पूजते हैं. इस इलाके में दोनों को भगवान की तरह पूजा जाता है. हेमंत कश्यप बताते हैं कि छत्तीसगढ़ के मैदानी इलाकों में जहां लोरिक-चंदा की कथा प्रचलित है, उसी तरह बस्तर में झिटकू-मिटकू की प्रेम कथा वर्षों से कही-सुनी जा रही है. बस्तर के शिल्पकार अपनी कला में बस्तर के मूर्तिकार घपादाई और खोडिया राजा की मूर्ति बनाना जरूरी समझते हैं. यही वजह है कि मूर्तिकला से जुड़ा हुआ कलाकार उनकी मूर्ति को बनाकर अपनी कला को सार्थक समझता है.
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First published: February 13, 2020, 11:36 AM IST
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