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एंबुलेंस के अभाव में पत्‍नी ने तोड़ा दम तो दुखी पति ने जहर खाकर दे दी जान

मृतक जगदीश का सुसाइड नोट. फोटो : न्‍यूज़18/ईटीवी
मृतक जगदीश का सुसाइड नोट. फोटो : न्‍यूज़18/ईटीवी

कई बार फोन करने के बावजूद एम्बुलेंस के नहीं आने से इलाज के अभाव में पत्नी की मौत के बाद वियोग में पति ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली.

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''बीस बार फोन लगाने के बावजूद संजीवनी एम्बुलेंस नहीं मिलने से बीमार पत्नी ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया, इसलिए जहर खाकर जान दे रहा हूं. मेरी मौत के लिए मै स्वंय जिम्मेदार हूं. इसके लिए परिवार वालों को तंग न किया जाए"

यह बात छत्‍तीसगढ़ में बेमेतरा जिले के साजा ब्लॉक के ग्राम संबलपुर के रहने वाले जगदीश मनहरे ने मौत के पहले सुसाइड नोट में लिखी. प्रदेश का यह पहला मामला है, जहां कई बार फोन करने के बावजूद एम्बुलेंस के नहीं आने से ईलाज के अभाव में पत्नी की मौत के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए पत्नी के वियोग में पति ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली.

आपको बता दें कि मृतक जगदीश मनहरे की 48 वर्षीय पत्नी तीजन बाई की सोमवार शाम अचानक तबीयत बिगड़ने लगी. पत्नी की तबीयत ज्यादा खराब होता देख पति जगदीश ने एम्बुलेंस के लिए 108 नंबर पर कई बार फोन किया. एंबुलेंस नहीं आने की वजह से इलाज के अभाव में जगदीश की पत्नी ने शाम करीब 5 बजे दम तोड़ दिया. प्रशासन की लापरवाही के चलते पत्नी की मौत से जगदीश व्यथित हो उठा और आज उसने मंगलवार को आत्मघाती कदम उठाकर अपनी जान दे दी.



बताया जा रहा है कि पत्नी के शव को दफनाने के लिए जगदीश गढ्डा खोदने के लिए जेसीबी किराए पर लाने के बहाने थानखम्हरिया आया हुआ था. यहां उसने सल्फास खा लिया और घर वापस आने के लिए बस में बैठ गया. बस में तबीयत बिगड़ने पर साथ में सवार यात्रियों ने मृतक के मोबाइल से उसके भांजे आत्माराम को फोन कर सूचना दी.
फोन से सूचना मिलने पर संजीवनी एम्बुलेंस से सुबह करीब 11 बजे उसे स्वास्थ्य केन्द्र थानखम्हरिया लाया गया, जहां मौजूद चिकित्सक ने जगदीश को जिला अस्पताल रेफर कर दिया. जिला अस्पताल पहुंचने पर ड्यूटीरत चिकित्सक निधि मेश्राम ने उसे मृत घोषित कर दिया.

मृतक के 6 बच्चे हैं. एक दिन पहले अपनी मां को खोने से गमजदा बच्चों पर पिता की मौत से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. बच्चों का रो- रोकर बुरा हाल है.
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