सफाई मित्र बनी महिलाओं के परिवारों को समाज से किया गया बहिष्कृत

बेमेतरा जिले में महिलाओं को स्वच्छ भारत अभियान से जुड़कर सफाई मित्र बनना समाज के ठेकेदारो को इतना नागवार गुजरा कि महिलाओं के परिवारों को समाज से बहिष्कृत करने का फरमान सुना दिया है.

Komal Singh Rajput
Updated: April 17, 2018, 12:04 PM IST
सफाई मित्र बनी महिलाओं के परिवारों को समाज से किया गया बहिष्कृत
सफाई मित्र बनी महिलाओं के परिवारों को समाज से किया गया बहिष्कृत
Komal Singh Rajput
Komal Singh Rajput
Updated: April 17, 2018, 12:04 PM IST
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में महिलाओं को स्वच्छ भारत अभियान से जुड़कर सफाई मित्र बनना समाज के ठेकेदारो को इतना नागवार गुजरा कि महिलाओं के परिवारों को समाज से बहिष्कृत करने का फरमान सुना दिया है. मामला जिले के थानखम्हरिया नगर पंचायत का है.

दरअसल, स्व सहायता समूह के माध्यम से महिलाएं प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने के लिए केंद्र परिवर्तित योजना के तहत नगर पंचायत के विभन्न वार्डों में सफाई मित्र बनकर डोर टू डोर कचरा इकट्ठा करने का काम कर रही हैं. आपको बता दें कि इस काम के बदले मिलने वाली प्रोत्साहन राशि से वो अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर करते हुए अपने परिवार का पेट पाल रही हैं.

ऐसे में महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होकर स्वाभिमानी होते देख केवट समाज के ठेकेदारों ने समाज के 6 परिवारों को बहिष्कृत करते हुए उनका हुक्का-पानी तक बंद कर दिया है. इस कारण उनके बच्चे अपने नाना-नानी के यहां गर्मी की छुट्टी मनाने नहीं जा पा रहे हैं. उन्हें डर है कि कहीं उनको भी उनके कारण समाज से बाहर ना कर दिया जाए, लेकिन सफाई मित्र महिलाओं ने हिम्मत नहीं हारी है और समाज के निर्णय के खिलाफ जाते हुए समाज को छोड़ देने की बात कही है.

महिलाओं का कहना है कि वो समाज छोड़ देंगी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत अभियान योजना को नहीं छोड़ेंगी. इस अभियान के तहत सफाई के साथ-साथ हमारा परिवार भी चल रहा है. वहीं महिलाओं ने पूछा भी है कि समाज ने सफाई के लिए क्या किया है ? क्या समाज उनका पेट भरेगी ? उनका कहना है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता है, लोगों की सोच जरूर छोटी हो सकती है.

वहीं समाज के ठेकेदारों की अपनी अलग ही दलील है. उनका कहना है कि कचरा इकट्ठा करना केवट समाज का काम नहीं है. कचरे को सॉलिड एंड लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट (एसएलआरएम) में ले जाकर छटनी करने और उसका खाद बनाना गलत है. उनका कहना है कि कचरा उठाने का काम स्वीपरों का है, समाज की महिलाओं का नहीं.

वहीं सामाजिक बहिष्कार का मामला सामने आने के के बाद नगर के थानेदार ने स्वयं मामले को संज्ञान में लेते हुए समाज के लोगों को बुलाकर समझाने का प्रयास किया है. बावजूद इसके उन पर कोई असर नहीं हुआ है.

बहरहाल, अभियान और पेट के लिए महिलाओं ने समाज को छोड़कर समाज के ठेकेदारों के मुंह पर जोरदार तमाचा जड़ा है. साथ ही समाज की कुरीतियों में जकड़े सामाजिक ठेकेदारों के साथ-साथ दुनिया को एक नए ग्रामीण भारत का आईना दिखाया है.
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