छत्तीसगढ़ः आदिवासी लड़की की सिसकियां सुन बोले सोनू सूद- आंसू पोछ ले बहन...
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छत्तीसगढ़ः आदिवासी लड़की की सिसकियां सुन बोले सोनू सूद- आंसू पोछ ले बहन...
बीजापुर की अंजली का वीडियो देख मदद को आगे आए सोनू सूद.

छत्तीसगढ़ में बाढ़ (Chhattisgarh Flood) के कारण किताबें भीग जाने से रोती आदिवासी लड़की का वायरल वीडियो (Viral Video) देख एक्टर सोनू सूद (Sonu Sood) ने पढ़ाई में सहयोग का दिया भरोसा.

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बीजापुर. कोरोना वायरस को लेकर लागू हुए लॉकडाउन (Lockdown) के बीच और उसके बाद भी बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद (Sonu Sood) के लोगों की मदद करने के किस्से रोज ही सुनने में आ रहे हैं. लॉकडाउन के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित लोगों की मदद के लिए भी सोनू सूद आगे आ रहे हैं. इसी क्रम में इस एक्टर ने छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की एक आदिवासी लड़की (Tribal Girl) के आंसू पोछने की पहल की है. प्रदेश के बीजापुर जिले के छोटे से गांव कोमला में रहने वाली आदिवासी छात्रा अंजली कुडियम की मदद को सोनू सूद आगे आए हैं. बीते 15-16 अगस्त की रात अंजली के गांव में बाढ़ का पानी घुस गया. परिजनों और अन्य ग्रामीणों के साथ देर रात करीब 3:30 बजे अंजली जान बचाकर गांव से 5 किलोमीटर दूर मिनगाछल के धाकड़पारा में शरण लेने को मजबूर हुई.

बारिश के कारण आई बाढ़ की वजह से अंजली अपने पिता सोमलु कुडियम, दादी, बुआ और भाई के साथ सुरक्षित स्थान पर तो चली गई, लेकिन पानी उतरने के बाद जब लौटकर आई, तो अपने घर का हाल देख हैरान रह गई. बाढ़ से उसका घर ढह गया था. घर का सामान बिखरा पड़ा था. इसी दौरान जब अंजली की नजर अपनी किताबों पर पड़ी तो बाढ़ के पानी में इन्हें भीगा देखकर उसके धैर्य का बांध टूट गया और वह फूट-फूटकर रोने लगी. यह दृश्य वहां मौजूद न्यूज 18 के संवाददाता ने देखी और पूरी घटना कैमरे में कैद कर ली. संवाददाता ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जो किसी तरह रीट्वीट होते हुए सोनू सूद तक भी पहुंच गया.


सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अंजली की सिसकियां जल्द ही सोनू सूद तक पहुंच गई. इसलिए वीडियो क्लिप शेयर होने के कुछ ही घंटों बाद न्यूज 18 संवाददाता के पास सोनू सूद की टीम का फोन आया. वहां से अंजली के बारे में और जानकारी मांगी गई. इसके बाद एक्टर सोनू सूद ने अपने टिवटर हैंडल से अंजली का वीडियो पोस्ट कर उसकी पढ़ाई के लिए हरसंभव मदद करने का भरोसा दिलाया.



कोमला गांव में रहने वाली अंजली भैरमगढ़ के सरकारी स्कूल से 12वीं पास कर अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही है. उसका भाई नैमेड के सरकारी स्कूल में पढ़ता है. पिताजी पेशे से किसान हैं. 5 एकड़ की खेत में किसानी कर किसी तरह यह परिवार अपना भरण-पोषण कर रहा है. बाढ़ के पानी ने खेत में खड़ी आधी से ज्यादा फसल को तो तबाह किया ही, अंजली के सपने भी इसमें चूर होते दिखे. मगर सही समय पर एक सच्चे मददगार की पहल से अब अंजली का भविष्य संवरने के संकेत मिल रहे हैं.
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