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सारकेगुड़ा 'फर्जी' मुठभेड़: आदिवासियों का धरना स्थगित, सरकार से मिला FIR दर्ज करने का आश्वासन

Mukesh Chandrakar | News18 Chhattisgarh
Updated: December 7, 2019, 12:48 PM IST
सारकेगुड़ा 'फर्जी' मुठभेड़: आदिवासियों का धरना स्थगित, सरकार से मिला FIR दर्ज करने का आश्वासन
आदिवासियों ने चेतावनी दी है कि अगर 1 महीने के अंदर FIR दर्ज नहीं होगी तो फिर बड़ा आंदोलन किया जाएगा.

मालूम हो कि सारकेगुड़ा मामले की न्यायिक जांच रिपोर्ट आने के बाद पीड़ित दोषियों पर FIR दर्ज करने आदिवासी बासागुड़ा थाना पहुंचे थे. पुलिस द्वारा FIR दर्ज नहीं किए जाने से आक्रोशित पीड़ित और सामाजिक कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए थे.

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बीजापुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के सारकेगुड़ा (Sarkeguda) इलाके में जून 2012 को हुए कथित मुठभेड़ (Fake Encounter) के मामले में एफआईआर (FIR) की मांग को प्रदर्शन में बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और पीड़ितों ने अब अपना धरना स्थगित कर दिया है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा ने जल्द ही FIR दर्ज करवाने का आश्वासन दिया है. आश्वासन के बाद सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार और सोनी सोढ़ी ने धरना स्थगित कर दिया है. साथ ही चेतावनी दी है कि अगर 1 महीने के अंदर FIR दर्ज नहीं होगी तो फिर बड़ा आंदोलन किया जाएगा. मालूम हो कि सारकेगुड़ा मामले की न्यायिक जांच रिपोर्ट आने के बाद पीड़ित दोषियों पर FIR दर्ज करने आदिवासी बासागुड़ा थाना पहुंचे थे. पुलिस द्वारा FIR दर्ज नहीं किए जाने से आक्रोशित पीड़ित और सामाजिक कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए थे.

इन लोगों पर एफआईआर की हो रही मांग

सारकेगुड़ा इलाके के ग्रामीण शुक्रवार को तात्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह (Former CM Dr. Raman Singh), आईबी (IB) चीफ मुकेश गुप्ता, बस्तर आईजी लांगकुमेर, सीआरपीएफ (CRPF) डीआईजी S. एलांगो, एसपी प्रशांत अग्रवाल, टीआई इब्राहिम खान और 190वीं सीआरपीएफ, कोबरा जवानों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने बासागुड़ा थाने पहुंचे थे. बताया जा रहा है 7 लोगों के खिलाफ 17 पीड़ित परिवार नामजद एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में हैं.

ये है पूरा मामला

जून 2012 में बीजापुर के सारकेगुड़ा में सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ का दावा किया गया था. इस मुठभेड़ में 17 नक्सलियों के मारे जाने का दावा किया गया था, लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें ग्रामीण आदिवासी बताया. लगातार विरोध के बाद तत्कालीन सरकार ने न्यायिक जांच आयोग गठित की. जांच आयोग ने बीते नवंबर माह में अपनी रिपोर्ट सौंप दी. न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षा बलों की एकतरफा कार्रवाई में 17 आदिवासी मारे गए. इसी रिपोर्ट को आधार कर कांग्रेस ने कार्रवाई की मांग की है.

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First published: December 7, 2019, 12:48 PM IST
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