बीजापुर में नहर घोटाला: एसडीओ ने शिक्षाकर्मी और ऑपरेटर को भी मजदूर बना दिया

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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के भोपालपटनम ब्लाॅक के कोत्तापल्ली गांव में तालाब के नहर मरम्मत  के नाम पर हुए 29 लाख रुपये से अधिक के घोटाले में कई आश्चर्यजनक तथ्य सामने आए हैं.

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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के भोपालपटनम ब्लाॅक के कोत्तापल्ली गांव में तालाब के नहर मरम्मत  के नाम पर हुए 29 लाख रुपये से अधिक के घोटाले में कई आश्चर्यजनक तथ्य सामने आए हैं. सूचना का अधिकार के तहत मिले दस्तावेजों के अनुसार एसडीओ एमएल टण्डन ने मस्टर रोल में एक शिक्षाकर्मी, एक दिव्यांग और एक ऑपरेटर का नाम भी जोड़कर उनके फर्जी अंगूठे लगाए और मजदूरी निकाल हजम कर ली.

कोत्तापल्ली के इस घोटाले की शिकायत 5 अप्रैल को एसडीएम कोर्ट भोपालपटनम में दर्ज की गई. 8 अपै्रल 2019 को मौजूदा एसडीएम उमेश पटेल ने इसकी जांच रिपोर्ट बनाई और इसमें सात बिंदुओं पर एसडीओ एमएल टण्डन को दोषी पाया. इसी साल 14 मार्च को उन्होंने एसडीएम कोर्ट में गांव के लोगों का हलफनामे में बयान लिया. कोत्तापल्ली गांव की महेश्वरी कुरसम ने अपने बयान में कहा कि वे सहायक शिक्षक पंचायत (एलबी) हैं और मस्टर रोल में उनका नाम और अंगूठे का निशान है, वह फर्जी है. वे हस्ताक्षर करती हैं.

इसी गांव के यालम लक्ष्मैया ने बताया कि कृष्णा पिता लच्छैया रेशम विभाग सुकमा में ऑपरेटर था. नहर निर्माण के समय वह सुकमा में ही था, लेकिन अभी ऑपरेटर का काम छोड़ दिया है. इसी तरह बसंता पिता शंकरलाल दिव्यांग हैं ओैर मद्देड़ में शिक्षक हैं. लोदेड़ गांव के अशोक टिंगे का भी कहना है कि उन्होंने नहर निर्माण में काम नहीं किया है. उनका नाम लिखकर फर्जी हस्ताक्षर किया गया है. कुरसम लालाराम का भी कहना है कि उन्होंने काम नहीं किया है और उनका नाम लिखकर फर्जी अंगूठा लगाया गया है. जबकि वे आठवीं पास हैं.



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कोत्तापल्ली के पटेल कुरसम रामनारायण का नाम भी मस्टर रोल में जोड़ा गया है. उनका कहना है कि उनका नाम लिखकर अंगूठा लगाया गया है. जबकि वे हमेशा हस्ताक्षर करते हैं. कोत्तापल्ली के टिंगे बाबू का नाम भी जोड़कर मस्टर रोल में फर्जी अंगूठा लगाया गया है. बाबू ने इस बात का उल्लेख बयान में किया है.

इसी नहर के निर्माण में घोटाले की शिकायत की गई है.


15 दिन किया मशीनों से काम, प्रमाणपत्र भी फर्जी
कोत्तापल्ली गांव में बैठक हुई और एक पंचनामा तैयार किया गया. इसमें ग्रामीणों ने कहा कि काम मजदूरों से ना करवाकर ट्रैक्टर ब्लेड गाड़ी से कराया गया. ये काम 15 दिन चला. इस दौरान तत्कालीन एसडीओ एमएल टण्डन ने ग्रामीणों से कहा कि ये जलसंसाधन विभाग का काम है और इसे मशीन से कराया जाएगा, मजदूरों से नहीं. गुणवत्ता और अधूरे काम के बारे में सवाल किए जाने पर बाद में इसे किए जाने की बात एसडीओ ने कही. पूर्व सरपंच कुरसम लक्ष्मीनारायण का कहना है कि उन्हें कार्य पूर्णता का प्रमाणपत्र दिखाया. इसमें उनके हस्ताक्षर हैं. पूर्व सरपंच का कहना है कि उन्होंने ये कागज कभी देखा नहीं और उनका हस्ताक्षर भी फर्जी है.

रफा दफा न हो जाए ये केस?
दो साल तक इस मामले के अटके होने के बाद आए जांच प्रतिवेदन को लेकर भी ग्रामीण आशंकित हैं कि कहीं मामला दब ना जाए. मीडिया से चर्चा में कलेक्टर केडी कुंजाम ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है. ये फाइल उन तक नहीं आई है. क्योंकि आम चुनाव की व्यस्तता थी. उन्होंने कहा कि किसी को भी संरक्षण नहीं दिया जाएगा और कार्रवाई की जाएगी. बता दें कि जांच प्रतिवेदन में एसडीएम ने आईपीसी की सात धाराओं के तहत एसडीओ एमएल टण्डन के खिलाफ मामला दर्ज करवाने और नहर मरम्मत की लागत राशि 29.67 लाख रुपये की वसूली का प्रस्ताव कलेक्टर को दिया है.
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