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बस्तर के आदिवासी बच्चों को बाहरी दुनिया से रूबरू करा रही है CRPF, इस प्लान पर हो रहा काम
Bijapur News in Hindi

Mukesh Chandrakar | News18 Chhattisgarh
Updated: February 4, 2020, 12:51 PM IST
बस्तर के आदिवासी बच्चों को बाहरी दुनिया से रूबरू करा रही है CRPF, इस प्लान पर हो रहा काम
सीआरपीएफ आदिवासी बच्चों को मुख्यधारा में जोड़ने का प्रयास कर रही है. सांकेतिक फोटो.

बीजापुर (Bijapur) जैसे धुर नक्सल प्रभावित इलाके में लाल लड़ाकों से लोहा लेने तैनात किये गये सीआरपीएफ (CRPF) के जवान यहां माओवादियों (Maoist) के खात्में का प्रयास कर रहे हैं.

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बीजापुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बस्तर (Bastar) संभाग के बीजापुर (Bijapur) में माओवादियों (Maoist) से लोहा लेने आये जवान न केवल जंगलों का खाक छान रहे हैं. बल्कि सामाजिक सरोकार से जुड़े काम के साथ यहां के धुर माओवाद प्रभावित इलाके के युवाओं को बाहरी दुनिया से रूबरू कराकर उनके मानसिक विकास के साथ आत्मविश्वास बढ़ाने का काम भी कर रहे हैं. सीआरपीएफ (CRPF) पिछड़ेपन का दंश झेल रहे बीजापुर (Bijapur) के अंदरूनी गांवों के उन युुवाओं को देश के बडे शहरों का भ्रमण करवा रही है, जिन्होंने आज तक संभाग मुख्यालय जगदलपुर (Jagadalpur) और राजधानी रायपुर नहीं देखा है.

बीजापुर (Bijapur) जैसे धुर नक्सल प्रभावित इलाके में लाल लड़ाकों से लोहा लेने तैनात किये गये सीआरपीएफ (CRPF) के जवान यहां माओवादियों (Maoist) के खात्में का प्रयास कर रहे हैं. इसके साथ ही पिछड़ेपन का दंश झेल रहे बीजापुर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा ही रहे हैं. साथ ही सामाजिक सरोकार से जुड़े काम भी कर रहे हैं. बीजापुर में तैनात सीआरपीएफ 168वीं बटालियन इन सबसे एक कदम आगे बढ़कर जिले के अंदरूनी गांवों के युवाओं के मानसिक विकास और उन्हें बाहरी दुनिया से जोड़ने के लिए देश के अलग अलग बडे शहरों का भ्रमण अपने खर्च पर करवा रही है.

इन गांव के बच्चों को भारत भ्रमण
बीजापुर जिले के कोंडापल्ली, तर्रेम, लिंगागिरी, बासागुडा, पुसबाका, मुर्दोंडा जैसे गांव के युवाओं को दिल्ली, पोंडिचेरी, चंडीगढ, जयपुर और चेन्नई जैसे बडे शहरों का भ्रमण करवा कर सीआरपीएफ इन इलाकों के युवाओं का विश्वास के साथ दिल भी जीत रही है. सीआरपीएफ 168वीं बटालियन के सीओ वीके चैधरी ने बताया कि नेहरू युवा केन्द्र संगठन नाम के एकएनजीओ द्वारा देश के अलग अलग इलाकों में कल्चरल एक्सचेंज कार्यक्रम का आयोजन करवाया जाता है. इस कार्यक्रम में अलग अलग राज्यों के युवा शामिल होते हैं और साथ ही अपने अपने क्षेत्र की संस्कति और परंपरा से संबंधित सांस्कतिक कार्यक्रमों का प्रदर्शन करते हैं. सीआरपीएफ का मानना है कि पिछड़ेपन का दंश झेल रहे युवा यदि बाहरी दुनिया से रूबरू होंगे तो उनमें मुख्यधारा की समझ बेहतर तरीके से विकसित हो सकेगी. साथ ही युवाओं का मानसिक विकास होगा और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा.

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First published: February 4, 2020, 12:51 PM IST
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