झूठे आंकड़ों के सहारे वाहवाही, सरकार की इस खास योजना को पलीता लगा रहे बीजापुर के अधिकारी

भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के सपने को बीजापुर के अधिकारी पतीला लगाते हुए करोड़ों का भ्रष्टाचार कर रहे है.

Mukesh Chandrakar | News18 Chhattisgarh
Updated: June 13, 2019, 11:03 AM IST
झूठे आंकड़ों के सहारे वाहवाही, सरकार की इस खास योजना को पलीता लगा रहे बीजापुर के अधिकारी
बीजापुर में स्वच्छ भारत मिशन की हकीकत.
Mukesh Chandrakar | News18 Chhattisgarh
Updated: June 13, 2019, 11:03 AM IST
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 145 वां ज़न्मदिवस के दिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के राजपथ से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के क्लीन इंडिया के सपने को पूरा करने के उद्देश्य से स्वच्छ भारत अभियान को लांच किया था. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने 2 अक्टूबर 2019 तक स्वच्छ भारत बनाने का वादा किया था. दरअसल 2 अक्टूबर 2019 को बापू का 150 वां ज़न्मदिवस होगा. स्वच्छ भारत एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी बापू को, इसी उद्देश्य के साथ भारत के पीएम ने स्वच्छ भारत मिशन का आगाज़ किया था. मगर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के अधिकारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पीएम नरेंद्र मोदी के इस सपने पर भ्रष्टाचार का किछड फेंकते नजर आ रहे है. स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए हज़ारों शौचालय भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ गए है. टारगेट पूरा करने के उद्देश्य से अपनी जेब भरते हुए आधे-अधूरे शौचालय बनाकर ग्राम पंचायतों को ओडीएफ यानी की शौच मुक्त ग्राम पंचायत घोषित कर दिया गया है.

ऐसे मिलता है ओडीएफ का दर्जा



आपको शौचालयों के निर्माण में हुई गड़बड़ी के बारे में बताने से पहले ओडीएफ यानी ओपन डेफिकेशन फ्री क्या होता है और एक ग्राम पंचायत को शौच मुक्त ग्राम पंचायत का दर्ज़ा कैसे मिलता है, इस बारे में जानना ज्यादा महत्वपूर्ण है. दरअसल, जब किसी ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव ये दावा करते है कि उनका ग्राम पंचायत शौच मुक्त हो चुका है. तब जनपद पंचायत द्वारा एक जांच दल गठित कर संबंधित ग्राम पंचायत भेजा जाता है. इस जांच दल के रिपोर्ट को जिला पंचायत भेजा जाता है. जिला पंचायत द्वारा फिर एक जांच दल गठित कर उसी ग्राम पंचायत में निरिक्षण के लिए भेजा जाता है. जिला पंचायत के जांच दल के रिपोर्ट को राज्य सरकार के पास भेजा जाता है. राज्य सरकार द्वारा दूसरे जिले से एक जांच दल संबंधित ग्राम पंचायत भेजा जाता है. दूसरे जिले के जांच रिपोर्ट को फाइनल मानकर उस ग्राम पंचायत को ओडी एफ यानी कि शौच मुक्त ग्राम पंचायत का प्रमाण पात्र दिया जाता है. कुल मिलाकर, त्री स्तरीय जांच के बाद एक ग्राम पंचायत को शौच मुक्त ग्राम पंचायत का दर्ज़ा मिलता है.

आंकड़ों से अलग है हकीकत

स्वच्छ भारत मिशन के तहत बीजापुर के 4 ब्लॉक भैरमगढ़., बीजापुर, भोपालपटनम और उसूर के 103 ग्राम पंचायतों में शौचालय बनाए गए है. सरकारी आंकड़े के मुताबिक इस मिशन के तहत भैरमगढ़ ब्लॉक में 6659, बीजापुर में 4904, उसूर में 2989 और भोपालपटनम ब्लॉक में 7996 शौचालय बनाए गए है. यानी कि पूरे जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 22,548 शौचालय बनाए गए. बता दें कि 1 शौचालय के निर्माण के लिए 12 हज़ार रूपए सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि के रूप में दी जाती है, जिसमे से 9000 केंद्र सरकार द्वारा और 3000 रूपए राज्य सरकार द्वारा दिया जाता है. इस तरह से इस मिशन में 22,548 शौचालयों के निर्माण के लिए कुल 27 करोड़ 57 लाख 6 हज़ार रूपए खर्च किए गए. केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मिले टारगेट को पूरा करने के लिए जिले में 27 करोड़ 57 लाख 6 हज़ार रूपए की लागत से बनाए गए 22,548 शौचालयों के निर्माण में भ्रष्टाचार को अंजाम देते हुए बेहद ही घटिया निर्माण और लापरवाही बरती गई है.

पड़ताल में सामने आई ये बात

न्यूज 18 के पड़ताल में हमने पाया कि जिले में बनाए गये शौचालयों में से मात्र 10 फीसद शौचालय ही इस्तेमाल करने योग्य है. बाकी सभी बेकार हो गए है, खंडहर में तब्दील हो चुके है. साथ ही ओडीएफ घोषित किए गए अधिकांश ग्राम पंचायतों में आधे से भी कम शौचालय बनाए गये है. जो शौचालय बनाए गये उनकी स्थिति बेहद ही दयनीय है. कहीं शौचालय में छत नहीं तो कहीं टॉयलेट सीट ही गायब है. कहीं दरवाज़ा नहीं तो कहीं सेप्टिक टैंक ही नहीं बनाया गया. यदि बनाया भी गया तो बेहद ही निम्न स्तर का. कहीं ये सब बनाया भी गया तो निर्माण के 10 दिनों के अंदर ही पाइप टूटने की शिकायत या सेप्टिक टैंक के छोटे साइज़ की वजह से भर जाने की शिकायत मिली. या फिर टॉयलेट सीट ही टूट जाने की शिकायत ग्रामीणों ने की. ऐसे में ग्रामीण खुले में शौच जाने को मजबूर हैं.. जंगल, या फिर गाँव के नज़दीक के नदी-नाले का रुक करने को मजबूर हैं.. ग्रामीण बताते हैं कि, कईयों बार जंगल में शौच जाने के दौरान कई हादसे हो चुके हैं.. चेरामंगी की किस्टी करकु बताती हैं कि, उनके गाँव में बनाए गये अधिकाँश शौचालय निर्माण के बाद से ही खराब हैं.. उनके घर में ग्राम पंचायत द्वारा शौचालय का निर्माण किया गया था.. जो निर्माण के 10 दिनों के अंदर ही खराब हो गया.. इस वजह से मजबूरी में वो जंगल जाती हैं शौच के लिए.. पिछली बारिश में शौच करने के दौरान उन्हें एक बिच्छु ने भी काट लिया था..
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जिम्मेदारों की दलील

वहीं जिले के जनप्रतिनिधि भी मानते है कि शौचालयों के निर्माण में बड़े भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है. साढ़े 27 करोड़ की लागत से बनाए गए 22 हज़ार से अधिक शौचालयों के निर्माण में लापरवाही बरती गई है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि झूठा रिपोर्ट भेजकर अधिकारी खुद का पीठ थपथपाने का काम कर रहे है. जिला पंचायत उपाध्यक्ष शंकर कुडियम ने बताया कि कईयों बार सामान्य सभा की बैठक में शौचालय निर्माण में हो रहे भ्रष्टाचार और गुणवत्ता के साथ किये जा रहे खिलवाड़ का मामला उठाया गया. मगर अधिकारी कभी कोई कार्रवाई नहीं करते. वहीं इस पूरे मामले में बस्तर क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और क्षेत्रीय विधायक विक्रम शाह मंडावी ने जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है.

 

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