बीजापुर की खासियत है ये आम, अपने वजन और साइज के लिए है फेमस

बीजापुर में एक ऐसा आम फलता है जिसे देखने को दूर दराज़ से लोग आते है. इतना ही नहीं 3 से 4 किलो वजनी इस आम को शौक से खरीद कर अपने दोस्तों या परिजनों को दिखाने ले जाते है. 

Mukesh Chandrakar | News18 Chhattisgarh
Updated: June 13, 2019, 6:47 PM IST
Mukesh Chandrakar | News18 Chhattisgarh
Updated: June 13, 2019, 6:47 PM IST
बीजापुर जिला मुख्यालय से 9 किमी दूर नुकनपाल में किसान गोविन्द तलांडी ने अपने प्राइवेट नर्सरी में 7 किस्म के आम के पेड़ लगा रखे है. इन 25 किस्म के आम के पेड़ों में फलने वाले आमों में से 1 किस्म हाथिझूल का भी है. इस हाथिझूल आम का वज़न और साइज़ इसे इस इलाके में लोकप्रिय बनाता है. इस आम का वज़न आमतौर पर 3 से 4 किलोग्राम का होता है. किसान गोविन्द तलांडी बताते हैं कि 2010 में उन्होंने हथिझूल किस्म के 4 ग्राफ्टेड पौधे लगाए थे. 6 साल में इनका फलन शुरू हो गया. एक पेड़ में 25 से 30 आम फलते है. आम का वजन इतना अधिक होता है कि कभी कभी हवा आने पर ये गिर जाते है. इन दिनों 4 पेड़ों पर आम फले है. किसान गोविन्द तलांडी बताते है कि दूर दराज़ से लोग इस आम को देखने आते है. इस आम को खाने के लिए नही बल्कि अपने दोस्तों और परिजनों को दिखाने के लिए इसे खरीद कर ले जाते हैं.

नर्सरी में है कई और किस्म के फल



किसान गोविन्द तलांडी 10 एकड़ के नर्सरी में आम के साथ ही अलग-अलग किस्म के फलदार पेड़ लगा रखे हैं. सामान्य तौर पर ठन्डे स्थानों पर उगने वाले सेब और अंजीर के पेड़ भी इस बगीचे में है. गोविंद बताते है कि सेब और अंजीर के 2-2 पेड़ है. अगस्त से जनवरी के बीच सेब फलते है. उनका ये है कि परेशानी ये है कि सेबों को चूहों से नुक्सान होता है. इस नर्सरी में तेजपत्ता, चीकू, अंगूर, नारियल, केला, कटहल, सुपारी, आंवला के अलावा संतरा के पेड़ भी नजर आते है. इस नर्सरी में फलने वाले 25 किस्म के आमों में नीलम की तीन किस्मे है. इसके अलावा बैंगंनपल्ली, तोतापरी, दशहरी, लंगडा आदि किस्मे है. इस फार्म की खासियत ये है कि यहां दस से बारह पेड़ अचार वाले आम के है.

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हाथिझूल आम.


गोविंद का फार्म है खास

इस फार्म के मालिक किसान गोविन्द तलांडी बताते है कि आम के पौधे बैंगलोर और राजमेंदरी से मंगाए गए है. ख़ास बात ये है कि कई लोग हर रोज़ इस सीजन में आम खरीदने किसान गोविन्द तलांडी के घर पहुंचते है. गोविन्द घर आने वाले अपने दोस्तों और अपने ख़ास लोगों का स्वागत भी आम खिलाकर ही करते है. सिर्फ 2 महीने आम के सीजन में किसान आम बेचकर ही 50 हज़ार की आमदनी कर लेते हैं. वहीं उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक विनायक मानापुरे बताते है कि छत्तीसगढ़ में लगी किसी भी प्रदर्शनी में उन्होंने हाथिझूल से बड़ा आम नहीं देखा. उन्होंने कहा कि दरअसल बीजापुर के पामलवाया में नर्सरी 35 साल पहले बनी है और इस वेरायटी को कहां से लाया गया. इसका रिकॉर्ड नहीं है.

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दूर दराज से लोग आते है इस आम को खरीदने.

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