देश के तीसरे बड़े इन्द्रावती टाइगर रिजर्व में टाइगर नहीं, एनटीसीए ने रोका बजट!

देश के तीसरे सबसे बड़े इन्द्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ होने की पुष्टि नहीं होने से नेशनल टाइगर कंजर्वेशन ऑथोरिटी ने बाघ संरक्षण मद पर रोक लगा दी है.

Mukesh Chandrakar | News18 Chhattisgarh
Updated: February 11, 2019, 11:35 AM IST
देश के तीसरे बड़े इन्द्रावती टाइगर रिजर्व में टाइगर नहीं, एनटीसीए ने रोका बजट!
प्रतीकात्मक तस्वीर.
Mukesh Chandrakar | News18 Chhattisgarh
Updated: February 11, 2019, 11:35 AM IST
देश के तीसरे सबसे बड़े इन्द्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ होने की पुष्टि नहीं होने से नेशनल टाइगर कंजर्वेशन ऑथोरिटी ने बाघ संरक्षण मद पर रोक लगा दी है. अब डीएनए परीक्षण के बाद ही बाघ की मौजूदगी का पता लगेगा. हालांकि इन्द्रावती टाइगर रिजर्व बीजापुर के उपसंचालक ने एनटीसीए को 12 बाघों की मौजूदगी होने की रिपोर्ट जरुर भेजी है, लेकिन एनटीसीए ने रिपोर्ट को नहीं माना है.

बता दें कि वर्ष 2018 में इन्द्रावती टाइगर रिजर्व बीजापुर की ओर से एक रिपोर्ट तैयार कर नेशनल टाइगर कंजर्वेशन ऑथरिटी को भेजी गई है। यहां 12 बाघ होने के साक्ष्य को मद्देड, कुटरू कोर, पासेवाड़ा, सेंड्रा व पिल्लुर जैसे रेंजों में किये गए सर्वे में मिले साक्ष्य के आधार पर रिपोर्ट बनाई गई है. जिन साक्ष्यों को जुटा कर रिपोर्ट तैयार की गई है, उनमें से बाघ का पंजा, मल व उसके शिकार के साक्ष्य शामिल हैं.

इन्द्रावती टाइगर रिजर्व के एसडीओ रामसेवक वट्टी ने बताया कि अक्टूबर 2018 में टाइगर होने की एक रिपोर्ट एनटीसीए को भेजी गई थी, लेकिन एनटीसीए रिपोर्ट को नहीं मान रही है. एसडीओ वट्टी ने बताया कि डीएनए परीक्षण के बाद एनटीसीए साफ करेगा कि आईटीआर में बाघ है या नहीं. उन्होंने आगे बताया कि इसके चलते ही नवम्बर से राष्ट्रीय बाघ अभिकरण मद को एनटीसीए ने रोक दिया है. इसमें सालाना दो करोड़ रुपये का बजट दिया जाता है.



चार साल में एक बार वैज्ञानिक तरीके से होती है गणना

हर चार सालों में होने वाले वन्य प्राणीयों की गणना वैज्ञानिक तरीके से की जाती है. गणना जीपीएस सिस्टम से कनेक्ट होता है और इसकी मॉनिटरिंग देहरादून से की जाती है. एसडीओ वट्टी के मुताबिक इस बार बाघों के गणना के लिए रिजर्व क्षेत्र में कुल 54 ट्रेक लाइन बनाये गए थे. हर ट्रेक लाइन दो किलोमीटर तक डाले गए थे. इसकी मॉनिटरिंग देहरादून से हो रही थी. उन्होंने बताया कि टाइगर के विचरण करने का एरिया करीब बीस किलोमीटर तक होता है.
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