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मामूली बात पर भी पति-पत्नी पहुंच रहे कोर्ट! छत्तीसगढ़ की अदालतों में पेंडिंग है 2196 मैरिज पिटीशन
Bilaspur News in Hindi

Pankaj Gupte | News18 Chhattisgarh
Updated: February 25, 2020, 8:54 AM IST
मामूली बात पर भी पति-पत्नी पहुंच रहे कोर्ट! छत्तीसगढ़ की अदालतों में पेंडिंग है 2196 मैरिज पिटीशन
परिवार अदालत और मध्यस्थता केंद्र की कोशिशों के बावजूद पति-पत्नी तलाक लेकर अलग रहना अधिक पसंद कर रहे हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

पति-पत्नी की लड़ाई में बच्चों को भी हथियार बनाकर इस्तेमाल किया जाता है. विशेषज्ञों की मानें तो इसकी मुख्य वजह पति-पत्नी का अहंकार, शराब और ज्यादातर तो आईपीसी की धारा 498ए के दुरुपयोग है.

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बिलासपुर. 'मुमकिन है सफर हो आसां, कुछ साथ तो चलकर देखो. कुछ मैं भी बदलकर देखूं, कुछ तुम भी बदलकर देखो.' इन पंक्तियों का अनुसरण यदि जीवन में किया जाए तो संभव है कि परिवार टूटने से बच जाए. लेकिन आपसी सामंजस्य की कमी के चलते परिवारों में बिखराव के मामले परिवार न्यायालय (Court) में लगातार बढ़ रहे हैं. अदालत की लड़ाई में दाम्पत्य जीवन हार रहा है. परिवार अदालत और मध्यस्थता केंद्र की कोशिशों के बावजूद पति-पत्नी तलाक लेकर अलग रहना अधिक पसंद कर रहे हैं.

पति-पत्नी की लड़ाई में बच्चों को भी हथियार बनाकर इस्तेमाल किया जाता है. विशेषज्ञों की मानें तो इसकी मुख्य वजह पति-पत्नी का अहंकार, शराब और ज्यादातर तो आईपीसी की धारा 498ए के दुरुपयोग है. आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में 2020 में अब तक 2 हजार 196 मैरिज पिटीशन पेंडिंग हैं, जिसमें से 387 प्रकरणों का निराकरण हुआ है.

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मामूली विवाद में पति पत्नी पुलिस थाने पहुंचते हैं.


छोटे झगड़ों में भी पहुंचते हैं थाने



बिलासपुर में महिला पुलिस थाना प्रभारी सुनीता नाग बताती हैं कि पति-पत्नी छोटे मोटे झगड़ों को लेकर थाने पहुंच रहे हैं. इसमें अधिकांश मामला शराबी पति से तंग और मारपीट सहित प्रताड़ना का होता है. ऐसे मामलों में पुलिस शिकायत पर सीधे एफआईआर न करते हुए पहले तो टूटते हुए परिवार को जोड़ने का भरपूर प्रयास करती है. इसके बाद दोनों पर ही अंतिम निर्णय छोड़ दिया जाता है.

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एक्सपर्ट द्वारा पति पत्नी की काउंसलिंग की जाती है.


की जाती है काउंसलिंग
महिला थाने में रोज हो रहे दर्ज मामले को आपसी सहमति से सुलझाने के लिए हर सप्ताह दो दिन महिला परामर्श की टीम बैठती है, जो पति और पत्नी के बीच सुलह कराने का प्रयास करती है. बिलासपुर महिला थाना में बैठी काउंसलर आशा सिंह का कहना है कि वास्तव में महिलाओं के साथ प्रताड़ना का मामला तो आता ही है पर अधिकांश मामले महिलाओं की सुरक्षा और हित में बने कानून 498 और 498ए के दुरुपयोग करने के मामले भी आ रहे हैं.

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तलाक से पहले पति पत्नी को समझाने की पूरी कोशिश की जाती है.


..तो कुटुंब न्यायालय पहुंचते है
महिला थाने में प्रयास के बाद पति-पत्नी में विवाद का मामला कुटुंब न्यायालय पहुंचता है. यहां भी प्रकरण की सुनवाई से पहले एक बार मामले को सुलझाने की कोशिश की जाती है. बिलासपुर में कुटुंब न्यायालय की काउंसलर उषा किरण का कहना है कि पति-पत्नी के बीच की लड़ाई से सबसे ज्यादा प्रभावित उनके बच्चे होते हैं. दिनभर मां पिता की लड़ाई उनके दिमाग मे बैठ जाती है. उषा किरण का मानना है कि माता-पिता की घर पर और न्यायालय में चल रही कानूनी लड़ाई के बीच बच्चों को या तो उनके किसी करीबी रिश्तेदार के पास या फिर उन्हें हॉस्टल में अच्छे परवरिश के लिए भेज देना चाहिए. बिलासपुर जिला विधिक परिषद के सचिव एवं सिविल जज बृजेश राय का कहना है कि आजकल थानों और अदालतों में पहुंच रहे प्रकरणों का कारण है कि लोगों में कानून की जानकारी और साक्षरता बढ़ रही है.

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First published: February 25, 2020, 8:54 AM IST
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