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Bilaspur: हाईकोर्ट में जज के सामने बोली- मर्जी से गई थी साथ, दे दीजिए जमानत, और रिहा हो गया प्रेमी

लड़की के पिता ने अगवा करने और दुष्कर्म का आरोप  लगाया था.

लड़की के पिता ने अगवा करने और दुष्कर्म का आरोप लगाया था.

Chhattisgarh News: किशोरी को अगवा कर और उसके साथ दुष्कर्म (Rape Case) के आरोपी को बिलासपुर हाईकोर्ट (Bilaspur High Court) ने जमानत दे दी है. अदालत ने पीड़िता के बयान पर आरोपी को बेल दी.

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बिलासपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बिलासपुर हाईकोर्ट (Bilaspur High Court) में किशोरी को भगाकर ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में गिरफ्तार आरोपी प्रेमी को छुड़ाने खुद लड़की ने जज से गुहार लगाई. पीड़िता के बयान पर कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी. वहीं, उसके पिता ने आरोपी को नहीं छोड़ने की बात कहते रहे. इस प्रकरण में पुलिस की विवेचना में भी खामियां नजर आई. हाईकोर्ट ने किशोरी की सहमति और अधिवक्ता के तर्क पर आरोपित प्रेमी की जमानत को स्वीकार कर लिया है. दरअसल, कोरबा जिले के बालको नगर थाना क्षेत्र के रहने वाले युवक सैफ आलम और किशोरी के बीच प्रेम संबंध चल रहा था. 27 जनवरी 2021 को किशोरी के पिता ने थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. पिता ने बेटी को भगा ले जाने का आरोप लगाया था.

पिता की रिपोर्ट पर पुलिस ने धारा 363, 366 के तहत अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी. इस बीच 22 फरवरी को पुलिस ने आरोपी सैफ आलम और किशोरी को पकड़ लिया. इस दौरान किशोरी का बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने धारा 376 और पाक्सो एक्ट जोड़कर आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. फिर आरोपी प्रेमी ने निचली अदालत में जमानत अर्जी लगाई, जिसके खारिज होने के बाद उसने हाईकोर्ट की शरण ली.
कोर्ट में बोली- मर्जी से गई थी साथ…

अधिवक्ता समीर सिंह के माध्यम से दायर जमानत अर्जी में बताया गया कि पुलिस जिसे पीड़िता बता रही है वह अपनी मर्जी से युवक के साथ गई थी. दोनों एक महीने तक पटना और दिल्ली में रहे. वकील ने दावा किया कि पीड़िता बालिग है और दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते हैं और शादी करना चाहते हैं. इस मामले में कोर्ट ने प्रावधान के तहत पीड़िता और उसके पिता की सहमति मांगी. सुनवाई के दौरान वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए उनका पक्ष सुना गया. इस दौरान पीड़िता ने अपने प्रेमी को छोड़ने की गुहार लगाते हुए उससे शादी करने की बात कही.

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वहीं, दूसरी तरफ उसके पिता ने जमानत का विरोध किया. इस दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि पुलिस ने पीड़िता के नाबालिग होने के संबंध में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है. सिर्फ सरपंच द्वारा जारी जन्मप्रमाण पत्र है, जिसकी वैधानिकता नहीं है. इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस आरसीएस सामंत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद प्रकरण में धारा 164 के बयान और आरोपी के जमानत के संबंध में दिए गए अभिमत के साथ ही पीड़िता की उम्र को उठाए गए सवाल और विवेचना में हुई चूक का लाभ देते हुए आरोपी की जमानत अर्जी स्वीकार कर लिया है.

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