अजीत जोगी को HC से झटका, कर्मचारी खुदकुशी मामले में FIR हटाने की याचिका खारिज
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अजीत जोगी को HC से झटका, कर्मचारी खुदकुशी मामले में FIR हटाने की याचिका खारिज
बिलासपुर के मरवादी सदन में एक कर्मचारी ने खुदकुशी की थी. (File Photo)

सीनियर और जूनियर जोगी ने खुद पर लगे एफआईआर को निरस्त करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है.

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बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और जेसीसी जे सुप्रीमो अजीत जोगी (Ajit Jogi) की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. खुदकुशी के मामले में सीनियर जोगी को हाई कोर्ट (High Court) से तगड़ा झटका लगा है. कर्मचारी खुदकुशी मामले में एफआईआर (FIR) को निरस्त करने की याचिका (Petition) हाईकोर्ट ने खारिज (Dismissed) कर दी है. दरअसल, अजीत जोगी के बिलासपुर (Bilaspur) स्थित बंगले में एक कर्मचारी ने फांसी लगाकर खुदकुशी (Suicide) कर ली. इसके बाद मृतक के भाई ने अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी (Amit Jogi) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया था. इसके बाद सीनियर और जूनियर जोगी ने खुद पर लगे एफआईआर को निरस्त करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है.

मृतक के परिजनों ने लगाया था ये आरोप

बता दें कि 15 जनवरी की रात बिलासपुर स्थित मरवाही सदन में काम करने वाले कर्मचारी संतोष कौशिक ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी. मृतक संतोष कौशिक के बड़े भाई कृष्ण कुमार कौशिक ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए अपने भाई की खुदकुशी के लिए अजीत और अमित जोगी को जवाबदेह ठहराया था. कृष्ण कुमार का कहना था कि उसके भाई मृतक संतोष कौशिक को चांदी की केतली चोरी के आरोप में जेल भेजने की धमकी दी जा रही थी. इससे प्रताड़ित होकर संतोष ने खुदकुशी कर ली. मामले में बिलासपुर ने अजीत जोगी और अमित जोगी के खिलाफ मामला दर्ज किया था.



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मृतक के परिजनों ने अजीत जोगी और अमित जोगी पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था. (Demo PIc)




 

निष्पक्ष जांच की मांग की थी

अजीत जोगी और उनके बेटे जेसीसीजे के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी के खिलाफ सिविल लाइन थाने में आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया गया था. एफआईआर दर्ज होने के बाद अमित जोगी ने ट्वीट कर कहा था कि पीड़ित परिवार के साथ हमारी पूरी सहानुभूति है. राजनीतिक प्रतिशोध से सत्ताधारी दल के इशारे पर FIR दर्ज हुई, इसलिए न्यायिक मजिस्ट्रेट अथवा CBI से मामले की जांच हो.

 

 

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