अरुण साव: कानूनी दांव-पेंच में माहिर, राजनीतिक टेस्ट में पास होने की चुनौती

छत्तीसगढ़ का बिलासपुर संसदीय क्षेत्र वैसे तो 30 सालों से बीजेपी का गढ़ है, लेकिन इस बार जीत के लिए पार्टी को काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है.

News18 Chhattisgarh
Updated: May 19, 2019, 5:04 PM IST
अरुण साव: कानूनी दांव-पेंच में माहिर, राजनीतिक टेस्ट में पास होने की चुनौती
अरुण साव.
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Updated: May 19, 2019, 5:04 PM IST
छत्तीसगढ़ का बिलासपुर संसदीय क्षेत्र वैसे तो 30 सालों से बीजेपी का गढ़ है, लेकिन इस बार जीत के लिए पार्टी को काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है. बीजेपी ने इस बार कानूनी दांव पेंच में माहिर व संगठन के नेता अरुण साव को प्रत्याशी बनाया है. अरुण साव के लिए ये पहला मौका है, जब वे बड़े चुनावी मैदान में सीधे उतरे हैं. लोकसभा चुनाव 2019 में बिलासपुर से अरुण साव का सीधा मुकाबला कांग्रेस के अटल श्रीवास्तव से माना जा रहा है. इस सीट के लिए चुनावी लिहाज से दोनों ही प्रत्याशी नये हैं.

स्नताक की पढ़ाई करने के बाद अरुण साव नौकरी की जगह एलएलबी को चुना और इसी क्षेत्र को प्रोफेशन बनाया. बिलासपुर के नामी वकीलों में अरुण साव का ​नाम लिया जाता है. अरुण साव के परिवार के लोग शुरू से ही पार्टी और राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के कार्य में जुड़े थे. इसके चलते ही इन्होंने भी बीजेपी की सदस्यता ले ली. छात्रहित में अनेक आंदोलन किए और जनसमस्याओं को उठाते रहे हैं.



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मूलत: मुंगेली के रहने वाले अरुण साव एक जनपद सदस्य चुनाव लड़े थे, लेकिन सफलता नहीं मिली. बीजेपी सरकार के दौरान वे पूर्व उप महाधिवक्ता रह चुके हैं. मौजूदा सांसद लखन लाल साहू की टिकट काटकर बीजेपी ने अरुण साव को बिलासपुर सीट से प्रत्याशी बनाया है. चुनाव प्रचार के दौरान अरुण साव ने हर वर्ग को साधने की कोशिश की.

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बिलासपुर में हवाई सेवा शुरू न होना, किसानों को धान के बोनस व प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं मिलना, उसलापुर रेलवे स्टेशन को अपग्रेड न करना, यात्री सुविधाओं पर फोकस नहीं होने जैसे तमाम मुद्दे इस बार बिलासपुर में चुनाव का हिस्सा रहे. इन्हें पूरा करने का वादा बीजेपी प्रत्याशी ने जनता से किया.
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