3 लाख देकर सूदखोर ने मांगे 21 लाख, परेशान हेड क्लर्क पहुंच गया पुलिस थाने
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3 लाख देकर सूदखोर ने मांगे 21 लाख, परेशान हेड क्लर्क पहुंच गया पुलिस थाने
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया . (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मामले की शिकायत के बाद पुलिस (Police) ने आरोपी को गिरफ्तार (Arrest) कर लिया है.

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बिलासपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की बिलासपुर (Bilaspur) पुलिस ने एक शातिर सूदखोर को गिरफ्तार किया है. सूदखोर (Usury) ने रेलवे के हेड क्लर्क को 3 लाख रुपये उधारी (Load) देकर 9 लाख रुपये वसूल कर लिए. इसके बाद भी सूदखोर 21 लाख रुपये की मांग करता रहा. इस बात से परेशान होकर पीड़ित ने कर्जा एक्ट के तहत भयादोहन करने का अपराध दर्ज कराया. बताया जा रहा है कि इसी तरह उसने रेलवे के तकरीब 30 से अधिक कर्मचारियों को अपना शिकार बनाया है. मामले की शिकायत के बाद पुलिस (Police) ने आरोपी को गिरफ्तार (Arrest) कर लिया है.

शातिर सूदखोर का कारनामा

पुलिस ने बताया कि रेलवे परिक्षेत्र निवासी तारकेन टोपनो रेलवे के कमर्शियल विभाग में हेड क्लर्क हैं. पीड़ित ने 2018 में अपने निजी कार्य के लिए सचिन गोरख नाम के एक शख्स से 3 लाख रुपये उधार लिए थे. पीड़ित क्लर्क ने अपने वेतन से ब्याज सहित 9 लाख रुपए का कर्ज चुका दिया. लेकिन इसके बाद भी सचिन गोरख 21 लाख रुपये बकाया होने की बात कहकर वसूली का दबाव बनाता रहा. इसी तरह आरोपी रेलवे के करीब 30 कर्मचारियों को अपने चंगुल में फंसा चुका था. कर्मचारियों ने सूदखोर सचिन गोरख से 20 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का उधार लिया, लेकिन वह ब्याज सहित कर्मचारियों से लाखों रुपये की मांग कर दबाव बनाता था. उसकी हरकतों से तंग आकर पीड़ित रेलकर्मियों ने इस मामले की शिकायत सिटी कोतवाली में की. मामले में पुलिस ने आरोपित सूदखोर सचिन गोरख के घर की तलाशी ली, तब बड़ी मात्रा में दस्तावेज मिले. कर्मचारियों के हस्ताक्षर वाले चेक और स्टांप पेपर जैसे तमाम दस्तावेज बरामद हुए, जिसका उपयोग आरोपी ने कानूनी मदद लेकर रेलकर्मियों से वसूली के लिए करता है. फिलहाल, दस्तावेज को जब्त करने के बाद पुलिस ने आरोपित सचिन गोरख के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है.



पूछताछ में कबूला जुर्म
एएसपी ओपी शर्मा ने बताया कि आरोपी ने पूछताछ में ब्याज वसूलने के लिए लाइसेंस होने का दावा किया, लेकिन जांच में उससे लाइसेंस नहीं मिला. दरअसल, आरोपी रकम देते समय रेलकर्मियों से कोरे कागज और स्टांप पेपर में हस्ताक्षर करा लेता था. इसके साथ ही वह चेक भी हासिल कर लेता था. इन दस्तावेज को कोर्ट में लगाकर वह बकायदा रेलवे कर्मियों के वेतन से रकम काटने का आदेश करा लिया करता था. उसके इस कानूनी कार्रवाई को देखकर पुलिस भी हैरान रह गई. पुलिस का कहना है कि आरोपी जरूरतमंद रेलकर्मियों को अपना शिकार बनाता था. उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर वह अपनी शर्तों में कर्ज बांटता था. यही वजह है कि वह कोरे कागज और अन्य दस्तावेजों में हस्ताक्षर करा लेता था, ताकि, भविष्य में वह खुद कोर्ट की शरण ले सके, बहरहाल, पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ कर रही है.

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