CG: गया था पेट दर्द का इलाज कराने, कर दी नसबंदी... अब सरकार देगी ढाई लाख का हर्जाना

युवक की सहमति के बगैर डॉक्टरों ने उसकी नसबंदी कर दी. इतना ही नहीं उसे बाकायदा 1100 रुपए और प्रमाण पत्र भी दिए गए.

News18 Chhattisgarh
Updated: July 5, 2019, 11:02 AM IST
CG: गया था पेट दर्द का इलाज कराने, कर दी नसबंदी... अब सरकार देगी ढाई लाख का हर्जाना
छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पताल में पेट दर्द का इलाज कराने गए अविवाहित युवक की नसबंदी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है.
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Updated: July 5, 2019, 11:02 AM IST
छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पताल में पेट दर्द का इलाज कराने गए अविवाहित युवक की नसबंदी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. युवक की सहमति के बगैर डॉक्टरों ने उसकी नसबंदी कर दी. इतना ही नहीं उसे बाकायदा 1100 रुपए और प्रमाण पत्र भी दिए गए. बता दें कि युवक पढ़ा-लिखा नहीं है. ऐसे में अनपढ़ युवक 1100 रुपए और प्रमाण पत्र लेकर सीधा अपने गांव चला आया. इसके बाद दूसरे ग्रामीणों ने उसका प्रमाण पत्र देखने के बाद उसे नसबंदी होने की जानकारी दी. इसके बाद युवक ने थाने पहुंचकर एफआईआर दर्ज करवाई.

इधर, तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम ने दोषी डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी. युवक की याचिका पर दिए गए फैसले में जस्टिस गौतम भादुरी की बेंच ने राज्य सरकार को क्षतिपूर्ति के रूप में 2 लाख 50 हजार रुपए देने का निर्देश दिया है.

धोखे से दस्तखत लेकर कर दिया ऑपरेशन
बता दें कि 20 वर्षीय प्रीतम सोनवानी नामक पीड़ित युवक राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ तहसील के चांदीजोब गांव में रहता है. मामला करीब 8 साल पुराना है. वह पेट दर्द की तकलीफ लेकर बीते 26 सितंबर 2011 को डोंगरगांव के सरकारी अस्पताल पहुंचा, यहां उसे भर्ती कर लिया गया. इसके बाद उससे कुछ दस्तावेजों में दस्तखत करवाए गए. उसे एनेस्थीसिया देने के बाद उसका ऑपरेशन कर दिया गया.

कुछ दिन बाद ग्रामीणों से पता चला
वहीं युवक को अस्पताल से डिस्चार्ज करने के दौरान कर्मचारियों ने उसे बाकायदा 1100 रुपए और एक प्रमाण पत्र दिया. इसके बाद युवक गांव पहुंचा. कुछ दिनों बाद अन्य ग्रामीणों ने उसका प्रमाण पत्र देखकर बताया कि उसकी नसबंदी कर दी गई है. उसने 17 नवंबर 2011 को थाने में एफआईआर दर्ज करवाई, इसमें कहा कि डॉक्टरों ने बगैर उसकी सहमति के नसबंदी का ऑपरेशन कर दिया है. लिहाजा, उसने इसके लिए जिम्मेदार डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. बाद में मामले की विभागीय स्तर पर जांच भी हुई.

युवक की शिकायत पर तहसीलदार ने ऑपरेशन करने वाले डॉ. ताम्रकार और सेक्टर पर्यवेक्षक संतराम वर्मा व ए गनवीर सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए डोंगरगढ़ के एसडीएम को रिपोर्ट सौंपी थी. एसडीएम ने इस रिपोर्ट के आधार पर राजनांदगांव के कलेक्टर को रिपोर्ट भेजी और कार्रवाई के लिए सिफारिश की थी.
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राज्य शासन को दिए निर्देश
इधर, युवक ने वर्ष 2013 में हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी. अब मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस गौतम भादुरी की बेंच ने बगैर सहमति के अविवाहित युवक की नसबंदी को बलपूर्वक नसबंदी करने और डॉक्टरी लापरवाही का प्रकरण माना है. हाईकोर्ट ने राज्य शासन को पीड़ित युवक को क्षतिपूर्ति के रूप में 2 लाख 50 हजार रुपए का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं. राज्य सरकार को यह राशि जिम्मेदार अधिकारियों से वसूलने की छूट दी गई है.

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First published: July 5, 2019, 10:45 AM IST
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