2 महीनों के लिए वन अधिकार पट्टा बांटने पर लगी रोक, हाईकोर्ट का फैसला

News18 Chhattisgarh
Updated: September 6, 2019, 4:47 PM IST
2 महीनों के लिए वन अधिकार पट्टा बांटने पर लगी रोक, हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने शासन को जवाब प्रस्तुत करने निर्देशित भी किया है. (File Photo)

हाईकोर्ट ने (High Court) राज्य शासन (State Government) से महीने भर में जवाब तलब भी किया है. अब मामले की अगली सुनवाई 2 महीने के बाद होगी.

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बिलासपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में वन अधिकार पट्टे (forest rights lease) की बिक्री को लेकर हाईकोर्ट (Chhattisgarh High court) ने एक अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने वन अधिकार पट्टों के वितरण पर 2 महीने की रोक (Stay) लगाई दी है. साथ ही शासन को जवाब प्रस्तुत करने निर्देशित भी किया है. बता दें कि, जंगलों (Forest) को काटकर अपात्रों को बांटे जा रहे वन अधिकारी पट्टे को निरस्त कर जांच करने की मांग को लेकर रायपुर (Raipur) निवासी नितिन सिंघवी की कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट चीफ जस्टिस के डिवीजन बैंच ने वन अधिकार बट्टा बांटने पर आगामी आदेश तक रोक लगा दिया है. साथ ही राज्य शासन (State Government) से महीने भर में जवाब तलब भी किया है. अब मामले की अगली सुनवाई 2 महीने के बाद होगी.

याचिका में कही गई थी ये बात

बता दें की,  रायपुर निवासी नितीन सिंघवी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर किया है. इसमे कहा गया है कि शासन द्वारा वन अधिकार पट्टा बांटा जा रहा है, जिसमें जंगल के हरे भरे पेड़ों को काटकर अवैध कब्जा किया जा रहा है. याचिका में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट में सीतानदी अभ्यारण में वन भैसों के संरक्षण के लिए दायर टीएन गोधावर्मन की याचिका पर वर्ष 2012 में वन भैसों का संरक्षण करने और वनों से कब्जा हटाए जाने के आदेश दिए गए थे. साथ ही आवश्यक होने पर वनों से कब्जा हटाने के भी निर्देश दिए गए थे.  मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर उठाए गए मुद्दों पर जल्द सुनवाई और वन अधिकार पट्टों के वितरण पर 2 माह की रोक लगाई है.

साथ ही राज्य शासन (State Government) से महीने भर में जवाब तलब भी किया है. अब मामले की अगली सुनवाई 2 महीने के बाद होगी.


अपात्रों को बांटे जा रहे वन अधिकार पट्टे: नितिन सिंघवी

 छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश मे दो महीने के लिए वनाधिकार पट्टे बांटने पर स्टे लगा दिया है. जंगल काट कर अपात्रों को बांटे जा रहे वन अधिकार पट्टों पर जांच, अपात्रों को बांटे गये पट्टो को निरस्त करने और बांटने पर रोक की मांग लेकर रायपुर निवासी नितिन सिंघवी द्वारा दायर की गई याचिका को स्वीकार करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्टे लगाया है.

मामले के याचिकाकर्ता नितिन सिंघवी ने बताया कि वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के मुताबिक अगर कोई अनुसूचित जनजाति का 13 दिसम्बर 2005 के पहले 10 एकड़ वनभूमि तक कब्जा था तो वो ही वनाधिकार पट्टा प्राप्त करने की पात्रता रखेगा. इसके लिए उसे प्रमाण प्रस्तुत करना पड़ेगा. इसी प्रकार अन्य परंपरागत वन निवासियों जो 13 दिसम्बर 2005 के पूर्व वर्ष 1930 से वन क्षेत्रों में रह रहे है वे भी पट्टा प्राप्त करने के पात्र होंगे. नितिन सिंघवी का कहना है कि साल 2005 के बाद भी वनों की कटाई कर कब्जा करने वालों को वनाधिकार पट्टे बांटे गए है जिसकी जानकारी उन्होने अपनी जनहित याचिका में कोर्ट को दी है और उसके बाद कोर्ट ने वनाधिकार पट्टे बांटने पर स्टे लगा दिया है और सरकार से जवाब मांगा है.
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First published: September 6, 2019, 4:28 PM IST
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