दुष्कर्म मामले में विशेष कोर्ट के गठन नहीं होने की याचिका पर HC में सुनवाई

बिलासपुर हाईकोर्ट ने राज्य शासन को संशोधित दुष्कर्म पीड़ितों के क्षतिपूर्ति अधिनियम को सितंबर 2016 से लागू करने, पीड़ितों को पुनर्वास व्यवस्था करने और दुष्कर्म पीड़ित महिलाओं से संबंधित मामले का विशेष कोर्ट में कराने का आदेश दिया है.

Pankaj Gupte | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: February 15, 2018, 11:16 AM IST
दुष्कर्म मामले में विशेष कोर्ट के गठन नहीं होने की याचिका पर HC में सुनवाई
दुष्कर्म मामले में विशेष कोर्ट के गठन नहीं होने की याचिका पर HC में सुनवाई
Pankaj Gupte
Pankaj Gupte | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: February 15, 2018, 11:16 AM IST
छत्तीसगढ़ में बिलासपुर हाईकोर्ट ने राज्य शासन को संशोधित दुष्कर्म पीड़ितों के क्षतिपूर्ति अधिनियम को सितंबर 2016 से लागू करने, पीड़ितों को पुनर्वास व्यवस्था करने और दुष्कर्म पीड़ित महिलाओं से संबंधित मामले का विशेष कोर्ट में कराने का आदेश दिया है.

बता दें कि प्रदेश में बढ़ते दुष्कर्म के मामलों, पीड़िताओं को बेहद कम मुआवजा और सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन के मुताबिक ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत का गठन नहीं किए जाने को लेकर साल 2013 में लगाई गई जनहित याचिका में सुनवाई हुई है. लिहाजा, साल 2013 से ही इस याचिका में सुनवाई जारी है.

मालूम हो कि हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई करते हुए राज्य शासन, हाईकोर्ट और छत्तीसगढ़ स्टेट बार कौंसिल को नोटिस जारी किया था. सरकार की तरफ से जवाब प्रस्तुत करते हुए बताया गया था कि दुष्कर्म पीड़ित महिलाओं को मिलने वाली मुआवजा राशि में बढ़ोतरी की गई है. साथ ही 21 फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाना है, जिसमें से 16 में काम शुरू हो गया है.

दिल्ली में दिसंबर 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद जांजगीर-चांपा के पामगढ़ में रहने वाली बुजुर्ग महिला संतरा काथे और अन्य ने हाईकोर्ट अधिवक्ता मीना शास्त्री के माध्यम से 2013 में हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी.

इसमें राज्य शासन, हाईकोर्ट और छत्तीसगढ़ स्टेट बार कौंसिल को पक्षकार बनाया गया था. याचिका में प्रदेश में लगातार दुष्कर्म के बढ़ते मामले, कम मुआवजा मिलने, पीड़िताओं से संबंधित विशेष अदालत और पीड़िताओं के पुनर्वास करने को लेकर जनहित याचिका लगाई थी.

लिहाजा, मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट चीफ जस्टिस के डीबी ने पीड़िताओं को संशोधित बढ़े हुए मुआवजे की राशि, पुनर्वास और मामले से संबंधित विशेष अदालत में सुनवाई का आदेश दिया है. साथ ही इस याचिका को निराकृत न करते हुए हाईकोर्ट में ही लंबित रखा है. ताकि इस मामले से संबंधित और भी कई मामलों को आने वाले समय में इस याचिका में जोड़ा जा सके.
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