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बस्तर के 2 किसानों को मुआवजे में मिले 100 करोड़ रुपये, हाईकोर्ट पहुंचा मामला, जानें- फैसला

आरोप था कि पिता ने अपनी नाबालिग बेटी के साथ डरा-धमका कर दुष्कर्म किया था. (सांकेतिक चित्र)

आरोप था कि पिता ने अपनी नाबालिग बेटी के साथ डरा-धमका कर दुष्कर्म किया था. (सांकेतिक चित्र)

रावघाट परियोजनों के तहत बस्तर के एक गांव में रेलवे स्टेशन बनना है. गांव में 2 किसानों को जमीन के एवज में 100 करोड़ रुपये मुआवजा राशि दी गई थी. इस राशि के खिलाफ बस्तर रेलवे व प्रभावित किसानों दोनों की ओर से याचिका हाई कोर्ट में दायर की गई थी. इसी याचिका पर सुनवाई के बाद बड़ा फैसला कोर्ट ने दिया है.

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बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में रावघाट परियोजना में 100 करोड़ रुपए मुआवजा दिए जाने के मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपना फैसला सुना दिया है. अधिकारियों और भूस्वामियों के बीच हुई मिलीभगत से ज्यादा मुआवजा देना कोर्ट ने पाया और याचिका को खारिज कर दिया. इससे पहले कलेक्टर ने एफआईआर दर्ज कराई थी. मई 2022 में सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपने आदेश के फैसले को सुरक्षित रख लिया रह था. कोर्ट ने बीते मंगलवार को मामले में बड़ा फैसला दिया है.

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखते हुए भू स्वामियों को शासन के हड़पे गए रकम वापसी का आदेश दिया है. बता दें कि बस्तर को रायपुर से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण रेल लाइन रावघाट परियोजना का मामला घोटाले के शोर के बीच हाईकोर्ट पहुंचा. जहां एक तरफ बस्तर रेलवे प्राइवेट लिमिटेड ने हाईकोर्ट में प्रभावित किसानों को दी गई ज्यादा मुआवजा को वापस दिलाने की मांग की थी. वहीं किसानों ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की थी. हाईकोर्ट में दायर दोनों पक्षों ने याचिका में बताया कि रावघाट परियोजना के बीच में आ रहे बस्तर के ग्राम पल्ली में एक स्टेशन बनना है.

इनके मुआवजे को लेकर फैसला
ग्राम पल्ली में बली नागवंशी 2.5 हेक्टेयर और नीलिमा बेलसरिया 1.5 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई. इसके बदले उन्हें 100 करोड़ रुपए मुआवजा दिया गया. बहस के दौरान बस्तर रेलवे प्राइवेट लिमिटेड का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र की जमीन का अतिरिक्त मुआवजा दिए हैं. राजस्व विभाग के अधिकारियों से मिली भगत कर गड़बड़ी की गई है. सरकारी नोटिफिकेशन में यह जमीन ग्रामीण क्षेत्र में ही दिखा रहा है. वहीं किसानों का कहना था कि उनको सही मुआवजा दिया गया है. उनकी जमीन नगर निगम सीमा से लगी हुई है, जिसका कृषि भूमि से आवासीय उपयोग के लिए परिवर्तन करा लिया गया था. इसके कारण उनकी जमीन की कीमत दूसरे किसानों से अधिक हो गई.

मामले को सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने फैसले को रिजर्व कर लिया था. बीते मंगलवार को आए फैसले में कोर्ट ने भू स्वामियों की याचिका खारिज कर दी. वहीं इसी मामले से संबंधित एक याचिका में इरकॉन के दो अधिकारी सुरेश बी. मताली और एवीआर मूर्ति को राहत दिया है. उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया है.

Tags: Chhattisgarh news, Indian Railway news

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