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भ्रूण लिंग परीक्षण मामले में HC का बड़ा फैसला, अब डॉक्टर पर सीधे FIR नहीं कर सकती पुलिस

Pankaj Gupte | News18 Chhattisgarh
Updated: January 15, 2020, 5:34 PM IST
भ्रूण लिंग परीक्षण मामले में HC का बड़ा फैसला, अब डॉक्टर पर सीधे FIR नहीं कर सकती पुलिस
हाईकोर्ट जस्टिस संजय के. अग्रवाल के सिंगल बेंच में ये मामला लगा था.

बता दें कि डॉ. रोहलेदार पर घर में सोनोग्राफी मशीन लगाकर भ्रूण के लिंग का परीक्षण करने के मामले में एफआईआर दर्ज किया गया था.

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बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने भ्रूण लिंग परीक्षण (Fetal sex test) मामले में एफआईआर को लेकर एक अहम और बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि अब भ्रूण के लिंग जांच के मामले में डॉक्टर (Doctor) पर सीधे एफआईआर (FIR) पुलिस दर्ज नहीं कर सकती है. पीएनडीटी एक्ट में संबंधित क्रिमिनल कोर्ट (Criminal court) में परिवाद पेश कर सकती है पुलिस- मालूम हो कि महासमुंद (Mahasamund) जिले के सरायपाली विकासखंड के चिकित्सा अधिकारी डॉ.अमृतलाल रोहलेदार ने खुद के खिलाफ हुए एफआईआर को चुनौती देते हुए कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. फिलहाल कोर्ट (Court) ने डॉक्टर पर हुए एफआईआर को भी निरस्त करने का आदेश दे दिया है. बता दें कि डॉ. रोहलेदार पर घर में सोनोग्राफी मशीन लगाकर भ्रूण के लिंग का परीक्षण करने के मामले में एफआईआर दर्ज किया गया था. हाईकोर्ट जस्टिस संजय के. अग्रवाल के सिंगल बेंच में ये मामला लगा था.

कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

भ्रूण लिंग परीक्षण के मामले में हुए एफआईआर को चुनौती देते हुए एक डॉक्टर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर किया था. इसमें सुनवाई के बाद हाईकोर्ट जस्टिस संजय .के.अग्रवाल के सिंगल बेंच ने डॉक्टरों के पक्ष में बड़ा और अहम फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने कहा है कि ऐसे किसी मामले में पुलिस सीधे किसी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती. पुलिस इस मामले को लेकर पीएनडीटी एक्ट में संबंधित क्रिमिनल कोर्ट में परिवाद पेश कर सकती है. आदेश में हाईकोर्ट ने डॉक्टर पर हुए एफआईआर को भी निरस्त करने का भी आदेश दिया है.

ये है पूरा मामला

दरअसल, मामला महासमुंद जिले के सरायपाली में विकासखंड चिकित्सा अधिकारी अमृतलाल रोहलेदार का है. उन पर एक नेता ने घर पर सोनोग्राफी सेंटर चलाते हुए भ्रूण के लिंग का परीक्षण करने का आरोप लगाते हुए शिकायत किया था. शिकायत पर एसडीएम ने डॉक्टर को नोटिस जारी किया था. इस पर डॉक्टर ने जवाब प्रस्तुत करते हुए बताया था कि उनकी पत्नी एक स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं. उनके घर पर स्थित क्लिनिक पंजीकृत है और वे ऐसे किसी भी प्रकार के लिंग परीक्षण नहीं करते हैं. इसके बाद मामला कलेक्टर के पास पहुंचा और कलेक्टर में तहसीलदार को एफआईआर दर्ज करवाने कहा.

डॉक्टर ने लगाई थी याचिका

तहसीलदार की शिकायत पर पुलिस ने पीएनडीटी एक्ट की धारा 23(1)के तहत डॉक्टर के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया. डॉक्टर ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर किया और कहा कि मामले में पीएनडीटी एक्ट के तहत पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती. मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने डॉक्टर के पक्ष में फैसला सुनाया है. साथ ही प्रशासन को पीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की छूट दी गई है.ये भी पढ़ें: 

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First published: January 15, 2020, 5:34 PM IST
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