छत्‍तीसगढ़ पीएससी प्री-2017 के परिणाम दोबारा जारी करने के आदेश

हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि 22 जून से पहले कमेटी निर्णय नहीं ले पाती है तो होने वाली मुख्य परीक्षा की तिथि को आगे बढ़ा दिया जाए.

Pankaj Gupte | News18 Chhattisgarh
Updated: May 16, 2018, 12:32 AM IST
छत्‍तीसगढ़ पीएससी प्री-2017 के परिणाम दोबारा जारी करने के आदेश
फाइल फोटो.
Pankaj Gupte
Pankaj Gupte | News18 Chhattisgarh
Updated: May 16, 2018, 12:32 AM IST
छत्‍तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर ने पीएससी की प्रारम्भिक परीक्षा 2017 के परिणाम को दोबारा जारी करने का आदेश दिया है. साथ ही एक एक्सपर्ट कमेटी गठित करने के आदेश दिए हैं, जो कोर्ट के आदेश में अंकित प्रश्नों की दोबारा जांच करेगी. इन प्रश्‍नों में एप्टीट्यूड टेस्ट के 5 प्रश्न और सामान्य ज्ञान के 5 से 6 प्रश्न शामिल हैं.

इसके अलावा कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि कमेटी 15 दिनों के भीतर परिणाम को लेकर निर्णय ले. कोर्ट ने कहा है कि यदि 22 जून से पहले कमेटी निर्णय नहीं ले पाती है तो होने वाली मुख्य परीक्षा की तिथि को आगे बढ़ा दिया जाए.

आपको बता दें कि हाईकोर्ट ने छत्‍तीसगढ़ पीएससी 2017 की प्रारंभिक परीक्षा की मॉडल आंसर में गड़बड़ी के मामले में पिछली सुनवाई में पब्लिक सर्विस कमीशन को नोटिस जारी किया था. दरअसल मामला यह था कि परीक्षार्थी विनय अग्रवाल और अन्य परीक्षार्थियों ने हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई थी. इसमें बताया गया था कि छत्‍तीसगढ़ लोकसेवा आयोग ने 18 फरवरी को पीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2017 ली और 22 फरवरी को मॉडल आंसर घोषित कर दिए.

याचिकाकर्ताओं ने दो प्रश्नों के उत्तर को चुनौती देते हुए पीएससी को आवेदन दिया था. पीएससी ने उनके आवेदन का निराकरण तो किया नहीं, तीन अन्य आंसर को भी विलोपित कर दिया और 18 अप्रैल को रिजल्ट भी घोषित कर दिया. याचिका में कहा गया कि पीएससी का यह कदम नियम विरुद्ध है.

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने पीएससी से जवाब मांगा था. साथ ही यह पूछा था कि क्या याचिकाकर्ता के दो उत्तर और विलोपित किए गए तीन उत्तरों को मिलाकर वो परीक्षा में क्वालिफाई कर पा रहा है या नहीं. मंगलवार को मामले की सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने मामले को निराकृत करते हुए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने और दोबारा परिणाम जारी करने का आदेश दिया है.
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