टाइगर रिजर्व में आवास निर्माण के खिलाफ याचिका, हाईकोर्ट ने शासन से मांगा जवाब

अचानकमार टाइगर रिजर्व में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत बन रहे 621 मकानों और बाघ संरक्षण के मामले में लगाई गई एक जनहित याचिका पर छत्‍तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शासन से दो सप्‍ताह में जवाब मांगा है.

Pankaj Gupte | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: January 13, 2018, 7:19 PM IST
टाइगर रिजर्व में आवास निर्माण के खिलाफ याचिका, हाईकोर्ट ने शासन से मांगा जवाब
छत्‍तीसगढ़ उच्‍च न्‍यायालय.
Pankaj Gupte | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: January 13, 2018, 7:19 PM IST
अचानकमार टाइगर रिजर्व में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत बन रहे 621 मकानों और बाघ संरक्षण के मामले में लगाई गई एक जनहित याचिका पर छत्‍तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शासन से दो सप्‍ताह में जवाब मांगा है. साथ ही भोरमदेव टाइगर रिजर्व मामले में सड़क निर्माण पर स्टे बरकरार रखा है.

रायपुर निवासी नितिन सिंघवी की इस जनहित याचिका पर शुक्रवार को जस्टिस एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस संजय एस. अग्रवाल की डिवी‍जन बेंच ने सुनवाई की. नितिन सिंघवी ने अंतरिम आवेदन देकर कोर्ट को बताया कि वर्ष 2009 में अचानकमार को टाइगर रिजर्व घोषित करने उपरांत वहां से 25 गांव को विस्थापित किया जाना था. इनमें से 6 गांव का विस्थापन हो चुका है.

शेष 19 गांव का विस्थापन किया जाना बाकी है और उन्हीं 19 गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत मुंगेली जिला पंचायत द्वारा 621 पक्के मकान बनाए जा रहे हैं. चूंकि इन 19 गांव का भी विस्थापन किया जाना है, इसलिए यह निर्माण नहीं किया जाना चाहिए. उन्‍होंने अपनी याचिका में निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की है.

पूर्व में अचानकमार टाइगर रिजर्व से गुजरने वाली शिवतराई से केवचि जाने वाली सड़क पर कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद आवागमन रोक दिया गया, जिससे उस क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ गई हैं.

बाघों के संरक्षण हेतु दायर की गई जनहित याचिका के तहत ही भोरमदेव अभयारण्‍य से गुजरने वाली चिल्फी रेंगाखार- सालेवार सड़क चौड़ीकरण पर लगे स्टे को हटाने की मांग शासन की तरफ से की गई, जिस पर कोर्ट ने स्टे बरकरार रखते हुए दो सप्ताह बाद सुनवाई की तारीख निर्धारित करने के आदेश दिए हैं.

चिल्फी रेंगाखार सड़क भोरमदेव अभयारण्य के 14 किलोमीटर क्षेत्र से गुजरती है, जिसके चौड़ीकरण करने पर अभयारण्‍य में लगभग 3500 पेड़ काटे जाने प्रस्तावित है. यह क्षेत्र कान्हा नेशनल पार्क से भोरमदेव अभयारण्‍य में बाघों और अन्य वन्य प्राणियों के आने जाने का कारीडोर है. सड़क चौड़ीकरण से वन्‍य प्राणियों का जीवन प्रभावित होगा. इस संबंध में आपत्ति दायर करने पर कोर्ट ने सड़क निर्माण पर रोक लगा रखी है.
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