International Women's Day मिलिए बिलासपुर की इस 'पैडगर्ल' से, जिसने बदल दी महिलाओं की जिंदगी
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बिलासपुर की पूनम ने नेचुरल सेनेटरी पैड बना रही हैं. पूनम की नई खोज में प्रमुख रूप से बेसिल के बीज और मेथी के बीज का इस्तेमाल किया है. साथ ही कपड़ों से होने वाले संक्रमण से बचने की जानकारी भी दे रही हैं.

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फिल्म स्टार अक्षय कुमार की मूवी 'पैडमैन' की तर्ज पर बिलासपुर की बेटी पूनम भी 'पैडगर्ल' बनकर प्राकृतिक तरीके से पैड बना रही हैं. साथ ही गरीब महिलाओं को भी इसे बनाने के गुर सीखा रही हैं. इतना ही नहीं महिलाओं को पुराने तरीके से इस्तेमाल किए जाने वाले कपड़ों से होने वाले संक्रमण से बचने की जानकारी भी दे रही हैं. अपने इस कारनामे से बिलासपुर की पूनम सिंह इन दिनों खूब सुर्खियां बटोर रही हैं.

मालूम हो कि इंसान की छोटी से छोटी जरूरतों पर बाजार ने अपना कब्जा जमा रखा है. बाजार ने इंसान को अपने जाल में ऐसे फंसाया है कि मानव ने धीरे-धीरे प्राकृतिक तरीकों से खुद को दूर कर लिया है. वहीं इसके खतरनाक साइड इफेक्ट्स भी अब सामने आने लगे हैं. ऐसे में महिलाओं के लिए नेचुरल प्रोडक्ट लेकर आई बिलासपुर की पूनम किसी मिसाल से कम नहीं हैं. पूनम ने एक ऐसा प्राकृतिक सेनेटरी पैड को बनाया है, जिसका न तो कोई साइड इफेक्ट है और ना ही इसकी कीमत ज्यादा है. यह पैड सस्ता होने के साथ-साथ आसानी से डिस्पोज भी हो जाता है.

बिलासपुर की शासकीय कॉलेज की बायोलॉजी 2nd इयर की छात्रा पूनम सिंह को अपने रिसर्च और अक्षय कुमार की मूवी देखने के दौरान यह जानकारी मिली कि महिलाओं में महीने के दौरान कपड़ों का उपयोग करना खतरनाक है. इसके साइड इफेक्ट से महिलाएं कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों का शिकार हो रही हैं.



पूनम के मुताबिक बाजार में मिलने वाले महंगे पैडों में इस्तेमाल होनेवाला पेट्रोलियम जैली और सिंथेटिक काफी खतरनाक है. यह आसानी से डिस्पोज न होकर प्रकृति के लिए खासा नुकसानदेह है. इसके बाद पूनम ने रिसर्च शुरू की और एक नेचुरल सेनेटरी पैड बनाने की ठानी. पूनम की नई खोज में प्रमुख रूप से बेसिल के बीज और मेथी के बीज का इस्तेमाल किया है, जिसे रूई के अलग-अलग परतों में डालकर बैंडेज के इस्तेमाल से तैयार किया जाता है.



पूनम के मुताबिक बेसिल बीज में द्रव्य सोखने के गुण होते हैं और यह आसानी से उपलब्ध भी हो जाता है. आज पूनम अपने इस खोज को लेकर महिलाओं में जनजागरूकता भी फैला रही हैं, जिसका उन्हें अच्छा रिस्पॉन्स भी मिल रहा है. पूनम ने बताया कि इस पैड को बनाने में महज 2 से ढाई रुपए ही खर्च आता है, जो आम महिलाओं के पहुंच में है. वे आसानी से इसे घर पर बनाकर इस्तेमाल कर सकती हैं और कैंसर जैसी होने वाली बीमारियों से और बाजारू पैड के खर्च से बच सकती हैं.

वहीं सिम्स हॉस्पिटल की डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. आरती पाण्डेय ने भी पूनम के इस प्रयोग की काफी सराहना की है. बहरहाल, पूनम के इस खोज को जरूरत है एक नए मंच की ताकि बिलासपुर की इस बेटी की धूम दुनिया में हो और विभिन्न भ्रांतियों की शिकार महिलाएं सुखद और स्वस्थ जीवन जियें.

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