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प्राकृतिक आपदाओं से निपटने को एनडीआरएफ की तर्ज पर छत्तीसगढ़ ने बनाया एसडीआरएफ

प्राकृतिक आपदाओं से निपटने को एनडीआरएफ की तर्ज पर छत्तीसगढ़ ने बनाया एसडीआरएफ

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में प्राकृतिक आपदा  और आकस्मिक संकट की घड़ी में बचाव-राहत कार्यों के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की तर्ज पर राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) का गठन किया है.

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में प्राकृतिक आपदा और आकस्मिक संकट की घड़ी में बचाव-राहत कार्यों के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की तर्ज पर राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) का गठन किया है.

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में प्राकृतिक आपदा और आकस्मिक संकट की घड़ी में बचाव-राहत कार्यों के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की तर्ज पर राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) का गठन किया है.

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में प्राकृतिक आपदा और आकस्मिक संकट की घड़ी में बचाव-राहत कार्यों के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की तर्ज पर राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) का गठन किया है.

मुख्यमंत्री रमन सिंह ने मंगलवार को बिलासपुर जिले के भरनी (परसदा) गांव में एसडीआरएफ के प्रशिक्षण केन्द्र का शुभारंभ किया. इस केन्द्र के लिए लगभग दो करोड़ 10 लाख रुपए की लागत से निर्मित छात्रावास, प्रशासनिक भवन और सैनिक बैरक का भी लोकार्पण किया. इसमें होमगार्ड तथा नागरिक सुरक्षा संगठन के जवानों को अग्नि दुर्घटना सहित विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से निपटने तथा इन आपदाओं के दौरान राहत और बचाव उपायों का प्रशिक्षण दिया जाएगा. आम नागरिक भी वहां प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे.

इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिवृष्टि, बाढ़ और अग्नि दुर्घटना जैसी प्राकृतिक और आकस्मिक विपदाओं के समय यह आपदा मोचन बल काफी उपयोगी साबित होगा. उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण केन्द्र को लगभग 17 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया जाएगा.

मुख्यमंत्री ने इस केन्द्र का शुभारंभ करते हुए एसडीआरएफ की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं दी. उन्होंने कहा कि इसकी जरूरत काफी समय से महसूस की जा रही थी. आज यह जरूरत पूरी हुई. इस केन्द्र से प्रशिक्षित होकर एसडीआरएफ के जवान किसी भी प्राकृतिक संकट के समय लोगों के जान-माल की रक्षा के लिए पूरी मुस्तैदी से काम करेंगे.

रमन सिंह ने कहा कि इस प्रशिक्षण केन्द्र के शुरू होने के बाद राज्य में अग्नि शमन सेवाओं का और भी अधिक विस्तार किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक संकट और अन्य दुर्घटनाओं में पीड़ितों को तत्काल राहत की जरूरत होती है. राज्य में कई बड़े मेले-मड़ई और अन्य महत्वपूर्ण आयोजन होते हैं, जिनमें काफी संख्या में लोगों का आना-जाना लगा रहता है. ऐसे समय में किसी भी प्रकार की आकस्मिक दुर्घटना और भगदड़ की स्थिति में लोगों को सुरक्षा और राहत पहुचांने के लिए प्रशिक्षित बल आवश्यक होता है. यह प्रशिक्षण केन्द्र जरूरत को पूरी करेगा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में आपात कालीन चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के लिए संजीवनी 108 एक्सप्रेस वाहन सभी विकासखंडों में संचालित किए जा रहे हैं. विगत लगभग चार-पांच वर्ष में विभिन्न दुर्घटनाओं में घायल लगभग तीस हजार लोगों की जान संजीवनी एक्सप्रेस के जरिए बचाई गई है.

अग्निशमन सेवा और राज्य आपदा मोचन बल के महानिदेशक गिरधारी नायक ने बताया कि इस प्रशिक्षण केन्द्र में जवानों को 22 प्रकार की विभिन्न दुर्घटनाओं से लोगों के जान-माल की रक्षा के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा. जवानों को संभाग स्तर पर पांच अलग-अलग समूहों में 15-15 दिन के रोटेशन में प्रशिक्षण दिया जाएगा.

नायक ने बताया कि आपात सेवा और जन-धन की सुरक्षा ही एसडीआरएफ का लक्ष्य है. एसडीआरएफ के 140 जवानों को एनडीआरएफ के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया है.

Tags: Natural Disaster

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