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45 साल से हक की लड़ाई लड़ रहे शिक्षक को हाई कोर्ट मिला न्याय, मुआवजे में मिलेंगे इतने रुपये
Bilaspur News in Hindi

Pankaj Gupte | News18 Chhattisgarh
Updated: January 5, 2020, 12:52 PM IST
45 साल से हक की लड़ाई लड़ रहे शिक्षक को हाई कोर्ट मिला न्याय, मुआवजे में मिलेंगे इतने रुपये
दर दर विभागीय ठोकर खाने के बाद न्याय न मिलने से शिक्षक हाई कोर्ट की शरण मे आया था.(प्रतीकात्मक फोटो)

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बिलासपुर (Bilaspur) हाई कोर्ट (High Court) से 45 साल से हक की लड़ाई लड़ रहे एक सहायक शिक्षक (Teacher) को आखिरकार न्याय (Justice) मिल ही गया.

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बिलासपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बिलासपुर (Bilaspur) हाई कोर्ट (High Court) से 45 साल से हक की लड़ाई लड़ रहे एक सहायक शिक्षक (Teacher) को आखिरकार न्याय (Justice) मिल ही गया. दर दर विभागीय ठोकर खाने के बाद न्याय न मिलने से शिक्षक हाई कोर्ट (High Court) की शरण मे आया था. हाई कोर्ट ने शरणार्थी शिक्षक की गुहार की याचिका पर सुनवाई करते हुए विभाग की गलती को माना है. हाई कोर्ट ने पाया कि संबंधित अधिकारियों ने लगातार असहयोगात्मक रवैया अपनाया. इसकी वजह से याचिकाकर्ता इतने सालों से प्रताड़ित रहे.

बिलासपुर हाई कोर्ट (Bilaspur High Court) ने याचिका को मंजूर करते हुए याचिकाकर्ता को एक लाख रुपये का मुआवजा वो भी सलाना 12 प्रतिशत ब्याज के साथ देने राज्य सरकार को आदेश दिया है. दरअसल नोहर लाल ने सहायक शिक्षक रहते हुए साल 1973 में इस्तीफा दे दिया था. उसने अपने जीपीएफ के लिए विभाग को बार बार आवेदन दिया पर उसके जीपीएफ का देय नही हुआ. अंततः उसके लाख प्रयास के बार उसके शेष राशि का भुगतान वर्ष 2018 में किया गया.

मुआवजे के लिए याचिका
जीपीएफ की राशि का इतने विलंब से हुए भुगतान और उठाये गए परेशानी की मुआवजे को लेकर नोहर लाल ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की. बिलासपुर हाई कोर्ट ने 45 वर्षों से परेशान कर्मचारी के पक्ष के फैसला सुनाया है. इससे सहायक शिक्षक को राहत मिली है. मुआवजा के तौर पर भी याचिकाकर्ता को ठीक9ठाक रकम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

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First published: January 5, 2020, 12:52 PM IST
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