जॉब के लिए 80 हजार रुपये घूस मांगने पर युवक ने कमाई का निकाला ये शातिराना तरीका
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बुजुर्ग महिला बनी मददगार तो युवक निकला सौदागर, एक ने भीख मांगकर दूसरों की मदद को अपना मिशन बनाया तो दूसरे ने धार्मिक यात्रा की आड़ में अपने जेब भरने का अजीबो-गरीब नुस्खा निकाला है.

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बुजुर्ग महिला बनी मददगार तो युवक निकला सौदागर, एक ने भीख मांगकर दूसरों की मदद को अपना मिशन बनाया तो दूसरे ने धार्मिक यात्रा की आड़ में अपने जेब भरने का अजीबो-गरीब नुस्खा निकाला है. हम आपको अलग से सिक्के के दो पहलू के बारे में बताते हैं. एक तरफ जंहा एक बूढ़ी माता बिलासपुर के एक गावं, जिसकी दूरी कारीबन 20 किलोमीटर है, वहां से आकर शहर में भीख मांगती है और उस भीख से मिले राशि को अन्य जरूरत मंदों को बांट रही है. वहीं दूसरी तरफ एक पढ़े लिखे 35 वर्षीय युवक रायगढ़ से माता वैष्णव देवी के दर्शन करने पदयात्रा करता है.

युवक किसी देवी की भक्ति में पदयात्रा नहीं करता. बल्कि इसका यह एक पैसे कमाने का एक फार्मूला है. युवक बताता है कि वो मात्र 45 दिनों कि पदयात्रा में साढ़े 3 लाख से 4 लाख रुपये जनता से मांगकर कमा लेता है. पिछले कई वर्षों से उसने मांगे हुए पैसे को जोड़कर लगभग 35 से 40 लाख रुपये अपने खाते में जमा कर लिया है.

दरअसल बुजुर्ग नर्मदा बाई खुद्दार किस्म की हैं. घर में दो बेटे-बहू और पोते हैं. दोनों ही बेटे राजमिस्त्री हैं, जिससे उनकी खासी कमाई हो जाती है, पर इस मां ने शुरू से ही अपनी मेहनत की रोटी कमाना और दूसरों की मदद करने का ठान लिया था. नर्मदा बाई बताती हैं कि उन्होंने पहले तो अपनी मेहनत की कमाई से गांव में ही लाखों रुपये के लागत से मां दुर्गा का मंदिर निर्माण करवाया. अब जब वह बूढ़ी हो चुकी हैं, तब मांगकर अपना पेट पालती हैं और उसी मांगे हुए पैसों को दूसरे जरूरतमंद लोगों को देकर उनकी मदद करती हैं.



वहीं दूसरी ओर खुद को माता वैष्णव देवी का परम भक्त बताने वाला प्रदीप कुमार का दावा है कि उसका काम माता वैष्णव देवी के दरबार तक प्रतिवर्ष पदयात्रा करने के नाम पर लोगों से सहयोग लेना और उसी पैसे को अपने बचत खाते में डालना और अपने परिवार को पालना. प्रदीप ने बताया कि वो एक नौकरी के लिए इंटरव्यू दिया, वंहा उससे इंटरव्यू लेने वाले ने 80 हजार रुपये का डिमांड कर दिया. बस फिर क्या था दिमाग मे आसानी से पैसे कमाने का एक तरीका आया और इन्होंने एक माता की चुनरी खरीदी और गले मे लटका लिया. एक माता के परमभक्त होने का नेम प्लेट और निकल पड़ा पदयात्रा को.



प्रदीप रायगढ़ से वैष्णव देवी तक का सफर 45 दिनों में पूरा करता है. इसके लिए हर शहर -हर राज्य और हरेक लोगों से सहयोग राशि लेता है. 45 दिनों के सफर में लगभग साढ़े 3 लाख से 4 लाख तक जमा हो जाता है. ऐसा करते हुए उसने पिछले कई सालों से अब तक लगभग 35 से 40 लाख रुपये तक जमा कर डाला है.

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